आरटीओ कार्यालय से 320 कर्मचारी बाहर होने की तैयारी:ड्राइविंग लाइसेंस सेवाएं ठप होने का खतरा, स्मार्ट चिप की जगह अब ‘सिल्वर टच’ कंपनी संभालेगी काम

आरटीओ कार्यालय से 320 कर्मचारी बाहर होने की तैयारी:ड्राइविंग लाइसेंस सेवाएं ठप होने का खतरा, स्मार्ट चिप की जगह अब ‘सिल्वर टच’ कंपनी संभालेगी काम

प्रदेश के सभी आरटीओ और एआरटीओ दफ़्तरों में तैनात स्मार्ट चिप कंपनी के 320 कर्मचारियों को हटाने की तैयारी ने हज़ारों आवेदकों की चिंता बढ़ा दी है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर बायोमेट्रिक और प्रिंटिंग तक का पूरा सिस्टम रुकने की आशंका है। लखनऊ ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ ने इन कर्मचारियों को हटाने का प्रस्ताव परिवहन आयुक्त को भेज दिया है। स्मार्ट चिप की जगह अब ‘सिल्वर टच’ ड्राइविंग लाइसेंस प्रिंटिंग और संबंधित काम अब स्मार्ट चिप कंपनी से लेकर सिल्वर टच टेक्नोलॉजी को सौंप दिए गए हैं। नई कंपनी जल्द ही काम संभालने जा रही है। इसी बदलाव के बाद पुराने कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया तेज हुई है। आरटीओ प्रशासन का दावा है कि कई कर्मचारी वर्षों से एक ही जगह तैनात हैं, इसलिए उनकी बाहरी लोगों से ‘सांठगांठ’ हो चुकी है। कर्मचारियों का विरोध, बोले—हम पर झूठे आरोप कर्मचारी हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे मामूली 10–12 हजार रुपये वेतन पर काम कर रहे हैं और अचानक नौकरी जाने से परिवार की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। कर्मचारियों ने दलालों से मिलीभगत के आरोपों को नकारते हुए कहा कि आरटीओ के बाहर दलालों का जमावड़ा हमेशा रहता है, लेकिन कार्रवाई कभी नहीं होती। 320 कर्मचारियों के हटने से कामकाज ठप होने का खतरा सूत्रों की माने तो कर्मचारियों को हटाने से पूरे प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े काम लगभग रुक जाएंगे। नए लाइसेंस बनना, बायोमेट्रिक, प्रिंटिंग और उन्हें आवेदकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया बाधित होगी। इससे हज़ारों आवेदक फंस जाएंगे और लाइसेंस के लिए इंतज़ार और लंबा हो जाएगा। कर्मचारी लड़ाई के मूड में, धरने की तैयारी कर्मचारियों ने परिवहन आयुक्त से मुलाकात करने की तैयारी की है। उनका कहना है कि ज़रूरत पड़ने पर वे धरना-प्रदर्शन भी करेंगे। वे आरटीओ के बाहर चल रहे दलालों की तस्वीरें और वीडियो भी अफसरों के सामने पेश करेंगे। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। अचानक क्यों हुए सख्त अफसर? कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले जिलाधिकारी के छापे में आरटीओ के बाहर दलालों की लिस्ट पुलिस को दी गई, वीडियो रिकॉर्डिंग भी हुई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अचानक स्मार्ट चिप के कर्मचारियों पर शिकंजा कसना अफसरों के इरादों पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि विभाग के कुछ अधिकारी अपने पसंदीदा लोगों को तैनात करवाना चाहते हैं। आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी का बयान आरटीओ प्रशासन के संजय तिवारी ने कहा, “डीएल कार्यों की जिम्मेदारी स्मार्ट चिप से लेकर सिल्वर टच को दी गई है। कई कर्मचारी वर्षों से तैनात हैं, शिकायतें मिल रही थीं और बाहरी लोगों से सांठगांठ की बात सामने आई। इससे विभाग की छवि खराब हो रही है।”

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