गयाजी. संज्ञा समिति गयाधाम की आम सभा 2026 में शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज की एकजुटता, शिक्षा, संस्कार व राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा हुई। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आज समाज को शिवत्व अपनाने की जरूरत है। सामाजिक बुराइयों और विषमताओं को दूर करने के लिए हर व्यक्ति को भगवान शिव की तरह समाज का गरल पीकर सुधार की दिशा में काम करना होगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बृजेश कुमार मिश्र और देवेंद्र पाठक शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान सूर्य की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। आचार्य अजय मिश्र और अरुण मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। कहा- ब्राह्मण ऊर्जा और संस्कारों के संचरण का केंद्र कार्यक्रम के दौरान संज्ञा समिति के उन सदस्यों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रियरंजन मिश्र ने कहा कि हारमुज पूरी दुनिया का ऊर्जा संचरण केंद्र उभर कर इन दिनों सामने आया है। इसी प्रकार से शाकद्वीपीय ब्राह्मण देश के सभी समाज के लिए ऊर्जा और संस्कारों के संचरण का केंद्र है। आज मानवता संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन सनातन परंपरा में समाज को जोड़ने और मजबूत करने की शक्ति शाकद्वीपीय में है। उन्होंने कहा कि सूर्य उपासना केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि समाज को ऊर्जा देने का माध्यम भी है। बृजनन्दन पाठक ने शिक्षा, संस्कार और राजनीति में ब्राह्मण समाज की भागीदारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई और संस्कार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही समाज को एकजुट होकर राजनीतिक रूप से भी मजबूत बनना होगा। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज में ब्राह्मणों की संख्या सबसे अधिक है, इसके बावजूद राजनीति में उन्हें हाशिये पर रखा जा रहा है। लगभग सभी राजनीतिक दल ऐसा कर रहे हैं। ऐसे में ब्राह्मण समाज को अपनी ताकत और बौद्धिक क्षमता के बल पर खुद को मजबूत बनाना होगा, ताकि राजनीतिक दल भी समाज की ताकत को समझें और उचित भागीदारी दें। ब्राह्मणों की कम भागीदारी का मुद्दा भी उठाया उन्होंने बिहार सरकार में मंत्रिमंडल में ब्राह्मणों की कम भागीदारी का मुद्दा भी उठाया। कहा कि भूमिहार और राजपूत समाज को अच्छी संख्या में मंत्री पद मिले, लेकिन ब्राह्मण समाज को महज दो मंत्री पद देकर सीमित कर दिया गया, जबकि सवर्णों में ब्राह्मणों की आबादी अधिक है। सम्मेलन में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और कला के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले युवाओं को भी सम्मानित किया गया। अच्छे अंकों से परीक्षा पास करने वाले छात्रों को मंच पर सम्मान देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। वहीं संगीत के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे युवाओं को भी सम्मान मिला। सम्मेलन में गया के अलावा औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज के लोग शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता, शिक्षा और सामाजिक मजबूती पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही भविष्य की रणनीति तय करने पर विचार रखे गए। गयाजी. संज्ञा समिति गयाधाम की आम सभा 2026 में शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज की एकजुटता, शिक्षा, संस्कार व राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा हुई। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आज समाज को शिवत्व अपनाने की जरूरत है। सामाजिक बुराइयों और विषमताओं को दूर करने के लिए हर व्यक्ति को भगवान शिव की तरह समाज का गरल पीकर सुधार की दिशा में काम करना होगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बृजेश कुमार मिश्र और देवेंद्र पाठक शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान सूर्य की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। आचार्य अजय मिश्र और अरुण मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। कहा- ब्राह्मण ऊर्जा और संस्कारों के संचरण का केंद्र कार्यक्रम के दौरान संज्ञा समिति के उन सदस्यों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रियरंजन मिश्र ने कहा कि हारमुज पूरी दुनिया का ऊर्जा संचरण केंद्र उभर कर इन दिनों सामने आया है। इसी प्रकार से शाकद्वीपीय ब्राह्मण देश के सभी समाज के लिए ऊर्जा और संस्कारों के संचरण का केंद्र है। आज मानवता संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन सनातन परंपरा में समाज को जोड़ने और मजबूत करने की शक्ति शाकद्वीपीय में है। उन्होंने कहा कि सूर्य उपासना केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि समाज को ऊर्जा देने का माध्यम भी है। बृजनन्दन पाठक ने शिक्षा, संस्कार और राजनीति में ब्राह्मण समाज की भागीदारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई और संस्कार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही समाज को एकजुट होकर राजनीतिक रूप से भी मजबूत बनना होगा। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज में ब्राह्मणों की संख्या सबसे अधिक है, इसके बावजूद राजनीति में उन्हें हाशिये पर रखा जा रहा है। लगभग सभी राजनीतिक दल ऐसा कर रहे हैं। ऐसे में ब्राह्मण समाज को अपनी ताकत और बौद्धिक क्षमता के बल पर खुद को मजबूत बनाना होगा, ताकि राजनीतिक दल भी समाज की ताकत को समझें और उचित भागीदारी दें। ब्राह्मणों की कम भागीदारी का मुद्दा भी उठाया उन्होंने बिहार सरकार में मंत्रिमंडल में ब्राह्मणों की कम भागीदारी का मुद्दा भी उठाया। कहा कि भूमिहार और राजपूत समाज को अच्छी संख्या में मंत्री पद मिले, लेकिन ब्राह्मण समाज को महज दो मंत्री पद देकर सीमित कर दिया गया, जबकि सवर्णों में ब्राह्मणों की आबादी अधिक है। सम्मेलन में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और कला के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले युवाओं को भी सम्मानित किया गया। अच्छे अंकों से परीक्षा पास करने वाले छात्रों को मंच पर सम्मान देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। वहीं संगीत के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे युवाओं को भी सम्मान मिला। सम्मेलन में गया के अलावा औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज के लोग शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता, शिक्षा और सामाजिक मजबूती पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही भविष्य की रणनीति तय करने पर विचार रखे गए।


