बागपत के हमीदाबाद के पास इंसान और सिस्टम की संवेदनहीनता की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई, जहां एक नीलगाय सड़क हादसे में बुरी तरह घायल होकर घंटों तक तड़पती रही। अज्ञात वाहन की टक्कर से उसकी टांग टूट गई और मुंह से खून बहता रहा, लेकिन मदद के नाम पर सिर्फ इंतजार मिला। गऊ रक्षक टीम और स्थानीय लोगों की कोशिशों के बावजूद प्रशासन की देरी ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नहर किनारे हादसा, बुरी तरह घायल हुई नीलगाय घटना नए गांव हमीदाबाद के पास नहर किनारे की है, जहां तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने नीलगाय को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि उसकी अगली टांग की हड्डी टूट गई और वह सड़क किनारे गिरकर तड़पने लगी। सूचना मिलते ही सक्रिय हुए गऊ रक्षक स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया के जरिए जैसे ही घटना की जानकारी मिली, गऊ रक्षक दल मौके पर पहुंच गया। टीम ने घायल नीलगाय की हालत देखी और तुरंत पुलिस व वन विभाग को सूचित किया, ताकि उसे समय पर इलाज मिल सके। पुलिस-वन विभाग की देरी ने बढ़ाया दर्द मदद के लिए बार-बार फोन करने के बावजूद टटीरी पुलिस चौकी से हेड कांस्टेबल राजन हर बार “आ रहे हैं” कहकर टालते रहे। वहीं वन विभाग की टीम भी करीब दो घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। इस दौरान घायल नीलगाय दर्द से कराहती रही। गऊ रक्षक टीम ने संभाली जिम्मेदारी प्रशासन के पहुंचने से पहले गऊ रक्षक टीम ने ही नीलगाय को संभालने का जिम्मा उठाया। उन्होंने उसे शांत रखने और हालत बिगड़ने से बचाने की हर संभव कोशिश की, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे मदद को इस दौरान किसान मजदूर संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता शांतनु मानव राजपूत, ध्रुव राजपूत, शिवम लड्डू, रीतिक और पिंटू समेत कई लोग मौके पर मौजूद रहे। सभी ने मिलकर घायल नीलगाय की देखभाल में सहयोग किया। प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती तो नीलगाय को इतनी देर तक दर्द नहीं झेलना पड़ता। लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वन्य जीवों की जान बचाई जा सके।


