लखनऊ विवि में संस्कृत पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित:डॉ. दीक्षित बोले- संस्कृत भारत की आत्मा, लोक भाषा बनाना कर्तव्य

लखनऊ विवि में संस्कृत पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित:डॉ. दीक्षित बोले- संस्कृत भारत की आत्मा, लोक भाषा बनाना कर्तव्य

लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और लोक भाषा प्रचार समिति, उत्तर प्रदेश राज्य शाखा ने मंगलवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय व्याख्यान संगोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर लोक भाषा प्रचार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सदानंद दीक्षित मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. दीक्षित ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। उन्होंने इसे लोक भाषा के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करना आज के विद्यार्थियों का कर्तव्य बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पारंपरिक विज्ञान को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करने में संस्कृत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2 तस्वीरें देखिए… स्वाभिमान की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी डॉ. दीक्षित ने इस बात पर भी जोर दिया कि संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम सुमेर यादव ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृत की सामाजिक प्रासंगिकता और जन-सामान्य तक इसकी पहुँच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. अभिमन्यु सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अशोक कुमार शतपथी ने लोक भाषा प्रचार समिति के उद्देश्यों को रेखांकित किया और उपस्थित जनसमुदाय को संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। ये लोग शामिल हुए कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी श्री सौरभ तिवारी ने कुशलता से किया। डॉ. ऋचा पांडेय ने आभार ज्ञापन कर सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह संगोष्ठी संस्कृत के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई, जिसमें विशेषज्ञयों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।

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