गोरखपुर में शुरू हुआ राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान:स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेंगी मुफ्त दवा

गोरखपुर में शुरू हुआ राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान:स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेंगी मुफ्त दवा

गोरखपुर के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों, मदरसों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर मंगलवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। अभियान के तहत एक साल से उन्नीस साल तक के बच्चों को पेट में मौजूद कृमि को खत्म करने की दवा खिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान को तय कार्ययोजना के तहत एक साथ सभी केंद्रों पर संचालित किया गया। पीपीगंज स्थित श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में जिला स्तरीय उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ राजेश झा शामिल हुए और बच्चों को दवा खिलाकर अभियान की औपचारिक शुरुआत की। छूटे बच्चों के लिए मॉप-अप राउंड की व्यवस्था
CMO ने बताया कि जो बच्चे किसी कारणवश अभियान के दिन दवा नहीं ले पाए हैं, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के दौरान दवा दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले का कोई भी पात्र बच्चा कृमि मुक्ति दवा से वंचित न रहे। CMO ने कहा कि पेट में कृमि होने से बच्चों में कुपोषण, कमजोरी, खून की कमी और बार-बार बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण साल में कम से कम दो बार कृमि मुक्ति की दवा देना जरूरी माना गया है। जिले में तय किया गया बड़ा लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस अभियान के तहत जिले में करीब 23.72 लाख बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 2503 सरकारी स्कूलों, 2069 निजी स्कूल व मदरसों और 4244 आंगनबाड़ी केंद्रों को अभियान में शामिल किया गया। सभी केंद्रों पर प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई थी। CMO ने बताया कि कृमि मुक्ति की दवा पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। यह दवा भोजन के बाद दी जाती है, जिससे बच्चों पर किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि जिन बच्चों ने अभी तक दवा नहीं ली है, वे मॉप-अप राउंड में अपने बच्चों को जरूर दवा दिलवाएं। दवा के बाद हल्के लक्षण सामान्य
ACMO RCH डॉ ए.के. चौधरी ने बताया कि जिन बच्चों के पेट में अधिक कृमि होते हैं, उनमें दवा खाने के बाद हल्की मितली, उलझन या थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण सामान्य होते हैं और कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। अभियान के दौरान विद्यालय में बच्चों की स्वास्थ्य जांच भी की गई। इस मौके पर DCPM रिपुंजय पांडेय और आरबीएसके योजना की DEIC मैनेजर डॉ अर्चना भी मौजूद रहीं। स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के सहयोग की सराहना की।

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