मेरठ बुलियन ट्रेडर्स ने GJEPC से समर्थन मांगा:प्रस्तावित ज्वैलरी पार्क की स्थापना के लिए हुई मुलाकात

मेरठ बुलियन ट्रेडर्स ने GJEPC से समर्थन मांगा:प्रस्तावित ज्वैलरी पार्क की स्थापना के लिए हुई मुलाकात

मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन (MBTA) के एक प्रतिनिधिमंडल रविवार में मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर (JWCC) में IIJS भारत सिग्नेचर 2026 के दौरान GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली और कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मेरठ में एक ज्वैलरी पार्क की स्थापना पर चर्चा को आगे बढ़ाना था। प्रतिनिधिमंडल में MBTA के महासचिव विजयआनन्द अग्रवाल, अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल, उपाध्यक्ष संदीप अग्रवाल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ज्वैलरी टेक्नोलॉजी (NIJT), मेरठ के महासचिव दीपक जोहरी शामिल थे। एसोसिएशन ने GJEPC को बताया कि मेरठ एक प्रमुख बुलियन और ज्वैलरी क्लस्टर है, जहाँ अनुमानित 30,000 कारीगर और 5,000 से अधिक ज्वैलर्स, थोक व्यापारी और संबद्ध व्यवसाय कार्यरत हैं। इनमें से अधिकांश असंगठित क्षेत्र में हैं। एसोसिएशन ने क्लस्टर को संगठित विनिर्माण, आधुनिक मशीनरी और अनुपालन आधारित विकास की ओर ले जाने के लिए एक संरचित ज्वैलरी पार्क की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि मेरठ विकास प्राधिकरण ने प्रस्तावित पार्क के लिए लगभग 36,000 वर्ग मीटर भूमि की पहचान कर उसे आरक्षित किया है। हालांकि, भूमि के मूल्य निर्धारण और नीतिगत स्वीकृतियां अभी भी प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ की रणनीतिक खूबियों पर भी प्रकाश डाला। इनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के भीतर इसकी स्थिति, दिल्ली से निकटता, तेज परिवहन संपर्क और एक मजबूत मौजूदा कर आधार शामिल हैं। उन्होंने स्थानीय ज्वैलरी व्यापार से होने वाले उल्लेखनीय जीएसटी योगदान का हवाला देते हुए क्लस्टर की आर्थिक अहमियत और विकास क्षमता को रेखांकित किया। GJEPC नेतृत्व ने एक संरचित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी और अद्यतन व्यवहार्यता अध्ययन तथा विश्वसनीय एजेंसियों द्वारा समर्थित एक मजबूत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के महत्व पर जोर दिया। चेयरमैन किरीट भंसाली और कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे ने महाराष्ट्र में ज्वैलरी पार्कों के विकास से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि डेटा आधारित योजना और राज्य सरकारों के साथ समन्वित संवाद से स्वीकृतियों और क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सकती है। बैठक का समापन इस समझ के साथ हुआ कि GJEPC, उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने से पहले उसे मजबूत करने के लिए तकनीकी इनपुट, दस्तावेजीकरण और संवाद ढाँचे में सहायता प्रदानकरेगा।

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