MEA Briefing India: Iran को समझाने में Jaishankar रहे सफल, खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा के लिए मोदी लगा रहे पूरा जोर

MEA Briefing India: Iran को समझाने में Jaishankar रहे सफल, खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा के लिए मोदी लगा रहे पूरा जोर
भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का विस्तृत चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने हाल के दिनों में ईरान के विदेश मंत्री के साथ तीन दौर की बातचीत की है। इन वार्ताओं में मुख्य रूप से समुद्री जहाजरानी की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गयी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन वार्ताओं के बारे में अभी अधिक विस्तार से बताना सही नहीं है क्योंकि क्षेत्र की स्थिति अभी संवेदनशील और बदलती हुई है। उल्लेखनीय है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम के कारण तनाव बढ गया है और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और भारत की ऊर्जा आपूर्ति का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
हम आपको यह भी बता दें कि ईरान ने भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। हालांकि इस क्षेत्र में समुद्री यातायात की गति हाल की सैन्य कार्रवाइयों के बाद काफी धीमी हो गयी है। भारत सरकार लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाये हुए है।

इसे भी पढ़ें: अंतरराष्ट्रीय संदर्भ, वैश्विक व्यापार चुनौतियां और भारत की रणनीति

प्रेस वार्ता में प्रवक्ता ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वापसी के प्रयासों की जानकारी भी दी। उनके अनुसार लगभग नौ हजार भारतीय नागरिक ईरान में रह रहे हैं। इनमें विद्यार्थी, नाविक, व्यापारी, पेशेवर लोग और कुछ तीर्थ यात्री भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कई भारतीय नागरिक, विशेष रूप से विद्यार्थी, पहले ही देश लौट चुके हैं। तेहरान में रह रहे कई भारतीयों को सुरक्षित स्थानों और अन्य शहरों में स्थानांतरित किया गया है।
विदेश मंत्रालय उन भारतीय नागरिकों की भी सहायता कर रहा है जो स्थल सीमा मार्ग से अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से भारत लौटना चाहते हैं। मंत्रालय उन्हें वीजा उपलब्ध कराने और सीमा पार करने में भी मदद कर रहा है। प्रवक्ता ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि जो लोग जमीनी सीमा के माध्यम से ईरान से बाहर निकलना चाहते हैं, वह दूतावास द्वारा जारी परामर्श का पालन अवश्य करें।
प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल ने यह भी बताया कि पांच मार्च को भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव ने ईरान के दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किये थे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जानकारी होना आवश्यक है और बिना जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस दिन शोक पुस्तिका रखी गयी थी भारत ने उसी दिन उस पर हस्ताक्षर किये थे। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इस तरह के आरोप लगाये गये कि भारत ने शोक व्यक्त करने में कई दिन लिये।
इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी सहयोग परिषद द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव का भारत ने सह प्रायोजन किया है। इस प्रस्ताव को एक सौ पैंतीस देशों का समर्थन प्राप्त है। प्रवक्ता ने बताया कि यह प्रस्ताव भारत के कई महत्वपूर्ण दृष्टिकोणों को दर्शाता है। खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुदाय की बड़ी संख्या रहती है और उनकी सुरक्षा तथा कल्याण भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा सहयोग के विषय में प्रवक्ता ने यह भी बताया कि भारत अपने पड़ोसी देशों को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का प्रमुख निर्यातक है। बांग्लादेश सरकार ने भारत से डीजल आपूर्ति का अनुरोध किया है, जिस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2017 से बांग्लादेश को डीजल निर्यात जारी है, परंतु किसी भी निर्णय से पहले भारत की परिष्करण क्षमता, घरेलू आवश्यकता और उपलब्धता को ध्यान में रखा जायेगा। इसी प्रकार श्रीलंका और मालदीव सहित कई अन्य देशों से भी ऊर्जा सहायता के अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि ईरान ने बीस फरवरी को अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर ठहरने की अनुमति मांगी थी, जिसे एक मार्च को स्वीकृति दे दी गयी। इनमें से एक जहाज आईआरआईएस लावन चार मार्च को कोच्चि पहुंचा और उसका दल फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है।
इसके अलावा, पाकिस्तान द्वारा भारत कनाडा यूरेनियम समझौते पर की गयी टिप्पणी को भारत ने सख्ती से खारिज किया है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि परमाणु अप्रसार के मामले में भारत का रिकॉर्ड निष्कलंक है और इसे पूरी दुनिया मान्यता देती है। उन्होंने कहा कि जिस देश का गुप्त परमाणु प्रसार का इतिहास रहा है, उसे इस विषय पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान की विश्वसनीयता शून्य है और वह अक्सर अपने कृत्यों से ध्यान हटाने के लिए भारत पर आरोप लगाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है। इन वार्ताओं में उन्होंने संवाद और कूटनीति के माध्यम से शीघ्र शांति बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा और जनहानि रोकने के महत्व को भी रेखांकित किया।
नेपाल के संदर्भ में प्रवक्ता ने बताया कि वहां चुनावों के सफल समापन का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वतंत्र दल के अध्यक्ष रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर उन्हें जीत की बधाई दी और नेपाल के साथ साझी प्रगति और समृद्धि के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी।
देखा जाये तो विदेश मंत्रालय की आज की प्रेस वार्ता ने स्पष्ट किया कि वैश्विक संघर्षों और अनिश्चितताओं के दौर में भारत की विदेश नीति संतुलन, जिम्मेदारी और सक्रिय कूटनीति का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और शांति की वकालत जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि भारत विश्व मंच पर एक जिम्मेदार और विश्वसनीय शक्ति के रूप में उभर रहा है। आइये देखते हैं प्रवक्ता की ओर से बताई गयी बड़ी बातें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *