ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएस) की केंद्रीय समिति के आह्वान पर लोको पायलटों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इस दौरान धनबाद मंडल सहित अन्य क्षेत्रों के रेलवे चालक 48 घंटे तक भूखे रहकर रेल परिचालन करेंगे। सोनपुर मंडल के एआईएलआरएस के महासचिव और लोको पायलट ए.के. राव ने बताया कि एसोसिएशन के निर्देशानुसार, 2 दिसंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक धनबाद रेल मंडल के सभी लोको पायलट 48 घंटे की भूख हड़ताल पर रहेंगे। इस अवधि में वे भूखे रहकर ही ट्रेनों का संचालन करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्णय का कोडरमा टीम भी समर्थन कर रही है। कोडरमा के रेलवे लोको पायलट भी अगले 48 घंटे, यानी 4 दिसंबर 2025 की सुबह 10 बजे तक, भूखे रहकर रेल परिचालन में शामिल होंगे। निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है ए.के राव ने कहा कि लोको पायलट पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपना काम करते हैं, लेकिन उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है। उन्हें आराम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता, जबकि रेलवे सुरक्षित रेल परिचालन की अपेक्षा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे लोको पायलटों पर अत्याचार कर रही है। इसलिए एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर 48 घंटे की भूख हड़ताल के साथ रेल परिचालन जारी रखने का निर्णय लिया है। ये हैं मुख्य मांगें 1. हर विभागों का 50 प्रतिशत डी ए बढ़ने पर रेलवे द्वारा 1 जनवरी 2024 से ही सभी विभागों के कर्मचारियों का सभी भत्तों सहित टी ए भत्ता 25% बढ़ा दिया गया, परंतु लोको पायलट को मिलने वाला किलोमीटर भत्ता लगभग 2 वर्ष होने को हैं, अभी तक टी ए के सापेक्ष रनिंग भत्ता के एम ए नही बढ़ाया गया है। इसे बढ़ाया जाय। 2. किलोमीटर भत्ता का 70% आयकर मुक्त का नियम है, जिसे रेलवे नही दे रहा है। इसे शुरू किया जाय। 3. आवधिक विश्राम अर्थात साप्ताहिक विश्राम 46 घंटे का मिलना चाहिए लेकिन रेलवे 30 घंटे का ही दे रही है। 4. सुरक्षित रेल परिचालन हेतु हाई पावर कमान का सुझाव है कि लगातार दो रात्रि ड्यूटी से ज्यादा ड्यूटी नही होनी चाहिए। जो कि हमें मिलना चाहिए। 5. लोको पायलट जिस सेक्शन में गाड़ी चलाएगा उस सेक्शन का नियमतः पूर्ण रोड लर्निंग एल आर होना चाहिए परंतु आजकल इसे अनदेखी कर ट्रैन चलवाई जा रही है। इसमें सुधार किया जाय। 6. लोको पायलट को 36 घंटे में मुख्यालय वापस लाने का प्रावधान है, लेकिन उन्हें 72 घंटे तक मुख्यालय से बाहर रखा जा रहा है। इसमें बदलाव की आवश्यकता है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएस) की केंद्रीय समिति के आह्वान पर लोको पायलटों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इस दौरान धनबाद मंडल सहित अन्य क्षेत्रों के रेलवे चालक 48 घंटे तक भूखे रहकर रेल परिचालन करेंगे। सोनपुर मंडल के एआईएलआरएस के महासचिव और लोको पायलट ए.के. राव ने बताया कि एसोसिएशन के निर्देशानुसार, 2 दिसंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक धनबाद रेल मंडल के सभी लोको पायलट 48 घंटे की भूख हड़ताल पर रहेंगे। इस अवधि में वे भूखे रहकर ही ट्रेनों का संचालन करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्णय का कोडरमा टीम भी समर्थन कर रही है। कोडरमा के रेलवे लोको पायलट भी अगले 48 घंटे, यानी 4 दिसंबर 2025 की सुबह 10 बजे तक, भूखे रहकर रेल परिचालन में शामिल होंगे। निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है ए.के राव ने कहा कि लोको पायलट पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपना काम करते हैं, लेकिन उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है। उन्हें आराम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता, जबकि रेलवे सुरक्षित रेल परिचालन की अपेक्षा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे लोको पायलटों पर अत्याचार कर रही है। इसलिए एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर 48 घंटे की भूख हड़ताल के साथ रेल परिचालन जारी रखने का निर्णय लिया है। ये हैं मुख्य मांगें 1. हर विभागों का 50 प्रतिशत डी ए बढ़ने पर रेलवे द्वारा 1 जनवरी 2024 से ही सभी विभागों के कर्मचारियों का सभी भत्तों सहित टी ए भत्ता 25% बढ़ा दिया गया, परंतु लोको पायलट को मिलने वाला किलोमीटर भत्ता लगभग 2 वर्ष होने को हैं, अभी तक टी ए के सापेक्ष रनिंग भत्ता के एम ए नही बढ़ाया गया है। इसे बढ़ाया जाय। 2. किलोमीटर भत्ता का 70% आयकर मुक्त का नियम है, जिसे रेलवे नही दे रहा है। इसे शुरू किया जाय। 3. आवधिक विश्राम अर्थात साप्ताहिक विश्राम 46 घंटे का मिलना चाहिए लेकिन रेलवे 30 घंटे का ही दे रही है। 4. सुरक्षित रेल परिचालन हेतु हाई पावर कमान का सुझाव है कि लगातार दो रात्रि ड्यूटी से ज्यादा ड्यूटी नही होनी चाहिए। जो कि हमें मिलना चाहिए। 5. लोको पायलट जिस सेक्शन में गाड़ी चलाएगा उस सेक्शन का नियमतः पूर्ण रोड लर्निंग एल आर होना चाहिए परंतु आजकल इसे अनदेखी कर ट्रैन चलवाई जा रही है। इसमें सुधार किया जाय। 6. लोको पायलट को 36 घंटे में मुख्यालय वापस लाने का प्रावधान है, लेकिन उन्हें 72 घंटे तक मुख्यालय से बाहर रखा जा रहा है। इसमें बदलाव की आवश्यकता है।


