चिकित्सा शिक्षा विभाग के डॉक्टरों व स्टाफ के लिए जीवन बीमा अनिवार्य

चिकित्सा शिक्षा विभाग के डॉक्टरों व स्टाफ के लिए जीवन बीमा अनिवार्य

कर्नाटक Karnataka सरकार ने चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए टर्म इंश्योरेंस (जीवन बीमा) को अनिवार्य करने का फैसला किया है।

मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय पिछले महीने एक सड़क दुर्घटना में आइएएस अधिकारी महंतेश बिल्गी की मृत्यु के बाद लिया गया। तकनीकी चूक के कारण उनके परिवार को बीमा की हकदार राशि से लगभग 50 लाख रुपए कम मिले थे। मंत्री के अनुसार, मेडिकल कॉलेज की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में यह सामने आया कि राज्य सिविल सेवा से आइएएस में पदोन्नति के बाद अधिकारी ने टर्म इंश्योरेंस Insurance सिस्टम में अपनी सेवा स्थिति अपडेट नहीं की थी, जिससे परिवार को वित्तीय नुकसान हुआ।

आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवारों को पूरा बीमा कवर मिल सके

मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को सर्कुलर जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके वर्तमान वेतन और पद के अनुरूप टर्म इंश्योरेंस योजनाओं में नामांकन सुनिश्चित करना होगा, ताकि किसी भी आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवारों को पूरा बीमा कवर मिल सके।

किफायती प्रीमियम पर बेहतर योजनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश

मंत्री ने कहा कि कई कर्मचारी, विशेषकर कम वेतन वर्ग के, वित्तीय बाधाओं या जागरूकता की कमी के कारण पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस नहीं ले पाए होंगे। इसलिए अधिकारियों को प्रमुख बैंकों और बीमा कंपनियों से समन्वय कर किफायती प्रीमियम पर बेहतर योजनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, संविदा कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा के तहत टर्म इंश्योरेंस लाभ देने की व्यवहार्यता पर विचार किया जाएगा।

रोजगार में निरंतरता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकती है

एक अन्य निर्णय में मंत्री ने आरक्षण रोस्टर का सख्ती से पालन करते हुए अनुभवी और मेधावी आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा पदों पर स्थानांतरित करने की संभावना पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए नई भर्ती के बजाय सिद्ध अनुभव वाले योग्य आउटसोर्स कर्मियों को संविदा श्रेणी में शामिल कर रोजगार में निरंतरता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकती है।

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