जमुई चेंबर ऑफ कॉमर्स में कथित 1.80 लाख रुपए के गबन के आरोपों को लेकर मंगलवार शाम एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। पूर्व सचिव शंकर साह और पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रकांत भगत ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। ये आरोप चेंबर के अध्यक्ष सुनील बरनवाल और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली टीम की ओर से लगाए गए थे। मार्गदर्शक मंडल की बैठक में लिया गया था निर्णय प्रेस वार्ता एक निजी विवाह भवन में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता पूर्व चेंबर सदस्य और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मोहन राव ने की। उन्होंने पूरे विवाद को छवि धूमिल करने की कोशिश बताया। मोहन राव ने स्पष्ट किया कि 1.80 लाख रुपए निकालने का निर्णय मार्गदर्शक मंडल की सर्वसम्मति से लिया गया था। चेंबर के नाम पर प्रति सदस्य 250 रुपए की रसीद से कुल 4,78,250 रुपए जमा हुए थे,जो चेंबर के आधिकारिक खाते में जमा नहीं किए गए थे। ऐसी स्थिति में व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उक्त राशि को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया गया। राशि पूरी तरह सुरक्षित, गबन का सवाल ही नहीं- शंकर साह पूर्व सचिव शंकर साह ने साफ कहा कि यह राशि व्यवसायियों की है और पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि पैसा पुराने जमुई व्यवसायी संघ के खाते में जमा है।किसी तरह की अनियमितता या गबन नहीं हुआ है। उन्होंने व्यवसायियों से अपील की किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें। जो व्यापारी अभी तक संघ के सदस्य नहीं बने हैं, वे 10 दिसंबर 2025 तक निर्वाचन पदाधिकारी से सदस्यता लेकर संघ को मजबूत करें। प्रेस वार्ता में मौजूद रहे कई सदस्य प्रेस वार्ता में पूर्व सचिव शंकर साह, कोषाध्यक्ष चंद्रकांत भगत के अलावा रणजीत सिन्हा, संजय हिमांशु, मदन सिंह और अरुण कुमार शाह भी उपस्थित रहे। व्यवसायियों के हित और पारदर्शिता प्राथमिकता प्रेस वार्ता के अंत में यह संदेश दिया गया कि चेंबर के भीतर पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। व्यवसायियों के हितों के खिलाफ किसी भी प्रकार का भ्रम फैलाने की कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी। इस मामले ने चेंबर ऑफ कॉमर्स के आंतरिक विवादों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। जमुई चेंबर ऑफ कॉमर्स में कथित 1.80 लाख रुपए के गबन के आरोपों को लेकर मंगलवार शाम एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। पूर्व सचिव शंकर साह और पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रकांत भगत ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। ये आरोप चेंबर के अध्यक्ष सुनील बरनवाल और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली टीम की ओर से लगाए गए थे। मार्गदर्शक मंडल की बैठक में लिया गया था निर्णय प्रेस वार्ता एक निजी विवाह भवन में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता पूर्व चेंबर सदस्य और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मोहन राव ने की। उन्होंने पूरे विवाद को छवि धूमिल करने की कोशिश बताया। मोहन राव ने स्पष्ट किया कि 1.80 लाख रुपए निकालने का निर्णय मार्गदर्शक मंडल की सर्वसम्मति से लिया गया था। चेंबर के नाम पर प्रति सदस्य 250 रुपए की रसीद से कुल 4,78,250 रुपए जमा हुए थे,जो चेंबर के आधिकारिक खाते में जमा नहीं किए गए थे। ऐसी स्थिति में व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उक्त राशि को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया गया। राशि पूरी तरह सुरक्षित, गबन का सवाल ही नहीं- शंकर साह पूर्व सचिव शंकर साह ने साफ कहा कि यह राशि व्यवसायियों की है और पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि पैसा पुराने जमुई व्यवसायी संघ के खाते में जमा है।किसी तरह की अनियमितता या गबन नहीं हुआ है। उन्होंने व्यवसायियों से अपील की किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें। जो व्यापारी अभी तक संघ के सदस्य नहीं बने हैं, वे 10 दिसंबर 2025 तक निर्वाचन पदाधिकारी से सदस्यता लेकर संघ को मजबूत करें। प्रेस वार्ता में मौजूद रहे कई सदस्य प्रेस वार्ता में पूर्व सचिव शंकर साह, कोषाध्यक्ष चंद्रकांत भगत के अलावा रणजीत सिन्हा, संजय हिमांशु, मदन सिंह और अरुण कुमार शाह भी उपस्थित रहे। व्यवसायियों के हित और पारदर्शिता प्राथमिकता प्रेस वार्ता के अंत में यह संदेश दिया गया कि चेंबर के भीतर पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। व्यवसायियों के हितों के खिलाफ किसी भी प्रकार का भ्रम फैलाने की कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी। इस मामले ने चेंबर ऑफ कॉमर्स के आंतरिक विवादों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।


