बोकारो में विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू:ईस्टर्न इंडिया सीमेंट की एथनॉल फैक्ट्री गेट पर नियोजन की मांग

बोकारो में विस्थापितों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू:ईस्टर्न इंडिया सीमेंट की एथनॉल फैक्ट्री गेट पर नियोजन की मांग

बोकारो के बालीडीह थाना क्षेत्र स्थित जियाडा औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को विस्थापित रैयतों का आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में रैयतों ने ईस्टर्न इंडिया सीमेंट की एथनॉल फैक्ट्री के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। वे नियोजन और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय उन्हें नौकरी और उचित मुआवजे का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, कंपनी लगातार अपने वादों से मुकर रही है। 14 रैयतों के दस्तावेज सत्यापित किए गए थे रैयतों ने आरोप लगाया कि कंपनी वर्षों से उन्हें बातचीत और कागजी प्रक्रिया के नाम पर टाल रही है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पिछली बैठक में 14 रैयतों के दस्तावेज सत्यापित किए गए थे, लेकिन अब कंपनी ने अचानक खाता-वार नियुक्ति की नई शर्त रख दी है। इस नई शर्त से रैयतों में रोष और बढ़ गया है। उनका कहना है कि बार-बार नए नियम थोपकर उनकी उम्मीदों को तोड़ा जा रहा है, जिसे वे अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। धरना स्थल पर माहौल लगातार गर्म बना हुआ है और प्रदर्शनकारी “नियोजन दो, वादा निभाओ” जैसे नारे लगा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कंपनी नियोजन की प्रक्रिया पूरी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कंपनी की वादाखिलाफी से रैयतों का धैर्य टूट चुका है: भाजपा नेता इस मौके पर रैयत विस्थापित और भाजपा नेता अविनाश कुमार ने कहा कि कंपनी की बार-बार की वादाखिलाफी से रैयतों का धैर्य टूट चुका है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कंपनी को समझाकर विस्थापितों को जल्द नियोजन दिया जाए। अविनाश कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। विस्थापितों का यह धरना औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन और कार्य पर भी असर डाल सकता है। अब प्रशासन और कंपनी की अगली पहल पर सभी की नजरें टिकी हैं। बोकारो के बालीडीह थाना क्षेत्र स्थित जियाडा औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को विस्थापित रैयतों का आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में रैयतों ने ईस्टर्न इंडिया सीमेंट की एथनॉल फैक्ट्री के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। वे नियोजन और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय उन्हें नौकरी और उचित मुआवजे का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, कंपनी लगातार अपने वादों से मुकर रही है। 14 रैयतों के दस्तावेज सत्यापित किए गए थे रैयतों ने आरोप लगाया कि कंपनी वर्षों से उन्हें बातचीत और कागजी प्रक्रिया के नाम पर टाल रही है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पिछली बैठक में 14 रैयतों के दस्तावेज सत्यापित किए गए थे, लेकिन अब कंपनी ने अचानक खाता-वार नियुक्ति की नई शर्त रख दी है। इस नई शर्त से रैयतों में रोष और बढ़ गया है। उनका कहना है कि बार-बार नए नियम थोपकर उनकी उम्मीदों को तोड़ा जा रहा है, जिसे वे अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। धरना स्थल पर माहौल लगातार गर्म बना हुआ है और प्रदर्शनकारी “नियोजन दो, वादा निभाओ” जैसे नारे लगा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कंपनी नियोजन की प्रक्रिया पूरी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कंपनी की वादाखिलाफी से रैयतों का धैर्य टूट चुका है: भाजपा नेता इस मौके पर रैयत विस्थापित और भाजपा नेता अविनाश कुमार ने कहा कि कंपनी की बार-बार की वादाखिलाफी से रैयतों का धैर्य टूट चुका है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कंपनी को समझाकर विस्थापितों को जल्द नियोजन दिया जाए। अविनाश कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। विस्थापितों का यह धरना औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन और कार्य पर भी असर डाल सकता है। अब प्रशासन और कंपनी की अगली पहल पर सभी की नजरें टिकी हैं।  

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