उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर शेव–वैष्णव अखाड़ों में खींचतान:रामादल बोले- प्रशासन से मिलेंगे; अखाड़ा परिषद की चेतावनी- स्थिति मारपीट तक जा सकती

उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर शेव–वैष्णव अखाड़ों में खींचतान:रामादल बोले- प्रशासन से मिलेंगे; अखाड़ा परिषद की चेतावनी- स्थिति मारपीट तक जा सकती

उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को लेकर शेव और वैष्णव अखाड़ों के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पूरी ने चेतावनी दी है कि रामेश्वर दास महाराज के बयानों से संत समुदाय आक्रोशित है और स्थिति विवाद या मारपीट तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर, रामादल के नए अध्यक्ष रामेश्वर दास महाराज का कहना है कि वे सिंहस्थ से जुड़े कार्यों और संतों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से मिलना जारी रखेंगे। विवाद की शुरुआत इस्तीफों से, दो खेमों में बंटे विवाद की शुरुआत रविवार को हुई जब स्थानीय अखाड़ा परिषद के तीन पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद साधु–संत दो खेमों में बंट गए। शेव संप्रदाय के पदाधिकारी अलग हो गए, जबकि वैष्णव संप्रदाय ने सोमवार को ‘रामादल अखाड़ा परिषद’ का गठन कर अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। वैष्णव संतों ने साफ कहा कि वे अब सिंहस्थ की तैयारियों पर शेव अखाड़ों के साथ संयुक्त रूप से चर्चा नहीं करेंगे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने दी चेतावनी मंगलवार को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पूरी ने मीडिया से कहा कि रामेश्वर दास महाराज के बयानों से सन्यासी समुदाय में भारी असंतोष है। उन्होंने कहा- “संन्यासी एकजुट हैं, स्थिति विवाद या मारपीट तक पहुंच सकती है।” पूरी ने चेतावनी दी कि कुंभ की व्यवस्था अखाड़ा परिषद की जिम्मेदारी है, इसलिए रामादल सिंहस्थ कार्यों के लिए प्रशासन के पास न जाए। परिषद ने यह भी कहा कि रामादल केवल निजी कार्यों के लिए ही प्रशासन से संपर्क कर सकता है। रामादल बोले- हम प्रशासन से मिलेंगे बुधवार को रामादल के नए अध्यक्ष रामेश्वर दास महाराज मीडिया के सामने आए और अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रामादल का उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं है, बल्कि संतों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन से समन्वय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पुराने पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद समिति का पुनर्गठन करना पड़ा। रामेश्वर दास ने स्पष्ट कहा- ‘हम प्रशासन से मिलकर संतों की हरसंभव मदद करवाएंगे और सिंहस्थ की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।’ सिंहस्थ की तैयारियों पर पड़ रहा असर दोनों पक्षों की यह बढ़ती खींचतान अब सिंहस्थ की तैयारियों पर सीधा असर डाल रही है। प्रशासन को यह चिंता है कि अखाड़ों के बीच समन्वय टूटने से कुंभ की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अब आगे दोनों समूह क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सिंहस्थ की तैयारियों का भविष्य निर्भर करेगा। ये खबरें भी पढ़ें… सिंहस्थ कुंभ से पहले स्थानीय अखाड़ा परिषद भंग सिंहस्थ कुंभ से पहले उज्जैन में स्थानीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने इस्तीफा देकर परिषद को भंग कर दिया। रविवार दोपहर को दत्त अखाड़े की आपात बैठक में चार संतों ने परिषद से इस्तीफा देकर परिषद भंग होने का दावा किया। इधर, स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने ऐसे किसी भी जानकारी से इंकार किया है। ये खबर भी पढ़ें… संतों का विवाद गहराया, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की दो टूक सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों से पहले उज्जैन में संतों के बीच मतभेद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्थानीय अखाड़ा परिषद में टूट के बाद वैष्णव और शैव संतों के बीच विवाद और गहरा हो गया है। रविवार को स्थानीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद जहां परिषद भंग घोषित कर दी गई, वहीं अगले दिन वैष्णव अखाड़े के संतों ने अलग होकर रामादल अखाड़ा परिषद का गठन कर लिया और शैव अखाड़ों से किसी भी प्रकार का संपर्क न रखने का ऐलान कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…

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