बोकारो में हाथियों ने तीन को कुचल कर मारा:सभी एक ही परिवार के सदस्य, पहले भगाए गए थे हाथी, सुबह-सुबह लौटकर मचाया तांडव

बोकारो में हाथियों ने तीन को कुचल कर मारा:सभी एक ही परिवार के सदस्य, पहले भगाए गए थे हाथी, सुबह-सुबह लौटकर मचाया तांडव

बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत छुटकी पुन्नू गांव में हाथियों ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाया है। हाथियों के झुंड ने एक ही करमाली परिवार के तीन सदस्यों की जान ले ली, जबकि पांच अन्य ग्रामीण घायल हो गए। ग्रामीणों के अनुसार बुधवार की शाम करीब 7 बजे हाथियों का झुंड गांव में घुस आया था। उस समय ग्रामीणों ने मशाल, शोर और अन्य उपायों से हाथियों को किसी तरह भगा दिया। हालांकि खतरा टला नहीं था। गुरुवार तड़के करीब 3 बजे हाथियों का झुंड दोबारा गांव में घुसा और इस बार जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने घरों के गेट तोड़े और अंदर घुसकर सो रहे लोगों पर हमला कर दिया। घर से निकलने की कोशिश में घिरे बुजुर्ग हाथियों के अचानक हमले से गांव में अफरा-तफरी मच गई। घरों के भीतर सो रहे बुजुर्ग जान बचाने के लिए बाहर निकले, लेकिन हाथियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। हाथियों ने पटक-पटक कर तीन लोगों को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान गंगा करमाली, कमली देवी और गणेश करमाली की पत्नी भगिया देवी के रूप में हुई है। सभी एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। इस हमले में पांच अन्य ग्रामीण भी घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीन लोगों की एक साथ मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में रोष यह पहली घटना नहीं है। बीते 25 जनवरी को गोमिया प्रखंड के सुदूरवर्ती दरहाबेड़ा गांव में हाथियों के कुचलने से करमचंद सोरेन की मौत हो गई थी। उस घटना पर मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने संज्ञान लेते हुए वन विभाग को सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले रामगढ़ जिले में हाथियों ने रविंद्र दांगी को मारुति वैन से खींचकर मार डाला था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण दहशत में हैं। वन विभाग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत छुटकी पुन्नू गांव में हाथियों ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाया है। हाथियों के झुंड ने एक ही करमाली परिवार के तीन सदस्यों की जान ले ली, जबकि पांच अन्य ग्रामीण घायल हो गए। ग्रामीणों के अनुसार बुधवार की शाम करीब 7 बजे हाथियों का झुंड गांव में घुस आया था। उस समय ग्रामीणों ने मशाल, शोर और अन्य उपायों से हाथियों को किसी तरह भगा दिया। हालांकि खतरा टला नहीं था। गुरुवार तड़के करीब 3 बजे हाथियों का झुंड दोबारा गांव में घुसा और इस बार जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने घरों के गेट तोड़े और अंदर घुसकर सो रहे लोगों पर हमला कर दिया। घर से निकलने की कोशिश में घिरे बुजुर्ग हाथियों के अचानक हमले से गांव में अफरा-तफरी मच गई। घरों के भीतर सो रहे बुजुर्ग जान बचाने के लिए बाहर निकले, लेकिन हाथियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। हाथियों ने पटक-पटक कर तीन लोगों को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान गंगा करमाली, कमली देवी और गणेश करमाली की पत्नी भगिया देवी के रूप में हुई है। सभी एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। इस हमले में पांच अन्य ग्रामीण भी घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीन लोगों की एक साथ मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में रोष यह पहली घटना नहीं है। बीते 25 जनवरी को गोमिया प्रखंड के सुदूरवर्ती दरहाबेड़ा गांव में हाथियों के कुचलने से करमचंद सोरेन की मौत हो गई थी। उस घटना पर मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने संज्ञान लेते हुए वन विभाग को सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले रामगढ़ जिले में हाथियों ने रविंद्र दांगी को मारुति वैन से खींचकर मार डाला था। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण दहशत में हैं। वन विभाग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *