500 KM तक बढ़ा हॉर्मुज का दायरा, 2 और इलाकों पर निगरानी करेगा ईरान, कहा- ‘खून दे देंगे, पर जमीन नहीं’

500 KM तक बढ़ा हॉर्मुज का दायरा, 2 और इलाकों पर निगरानी करेगा ईरान, कहा- ‘खून दे देंगे, पर जमीन नहीं’

भारी संकट के बीच ईरान ने अपनी नई घोषणा से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। उसकी सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (आईआरजीसी) नेवी ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अब पहले जैसा छोटा-मोटा इलाका नहीं रहा। इसे अब 500 किलोमीटर तक फैला दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि जास्क और सिरीक से लेकर केश्म द्वीप और ग्रेटर टुनब द्वीप के आगे तक यह पूरा इलाका ईरान का ऑपरेशनल जोन बन गया है। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव चरम पर है।

ईरान ने क्या कहा?

ईरानी नेवी के पॉलिटिकल डिप्टी मोहम्मद अकबरजादे ने तस्नीम न्यूज एजेंसी को बताया कि पहले हॉर्मुज स्ट्रेट को सिर्फ हॉर्मुज और हेंगाम जैसे द्वीपों के आसपास का छोटा सा इलाका माना जाता था। अब सब बदल गया है। उन्होंने कहा- आज यह 20-30 मील की जगह 200-300 मील यानी करीब 500 किलोमीटर का बड़ा क्षेत्र बन चुका है।

प्रेस टीवी के मुताबिक, रियर एडमिरल अकबरजादे ने मंगलवार को दोहराया कि अब हॉर्मुज को लेकर पुरानी बात लागू नहीं होती। ईरान की नौसेना अब इस पूरे बड़े क्षेत्र में अपनी रणनीति के अनुसार काम करेगी।’

‘खून देंगे लेकिन एक इंच जमीन नहीं छोड़ेंगे’

ईरानी अधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि कोई भी देश या जहाज उनके पानी में घुसपैठ नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- ईरान पूरे इलाके की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है। हम अपने हितों और पानी की रक्षा करेंगे। उन्होंने यह भी- हम खून दे देंगे लेकिन एक इंच जमीन नहीं छोड़ेंगे।’

ईरानी सशस्त्र बल देश की सीमा और समुद्री इलाके की पूरी ताकत से रक्षा करेंगे। इस बीच ईरानी सेना ने नया नियम भी जारी किया है। अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाला एकमात्र सुरक्षित रास्ता वही होगा जो ईरान तय करेगा। जो भी जहाज इस रास्ते से बाहर जाएगा, उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल गुजरता है। अगर यहां कोई रुकावट आई तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

ईरान का यह फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर उसकी मजबूत स्थिति दिखाता है। लेकिन साथ ही यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ टकराव बढ़ा सकता है।

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