हाईकोर्ट का यूपी के डीजीपी को निर्देश:हाईकोर्ट ने कहा- जिला प्रमुखों को सर्कुलर जारी करें कि जमानत अर्जियो में लापरवाही न हो

हाईकोर्ट का यूपी के डीजीपी को निर्देश:हाईकोर्ट ने कहा- जिला प्रमुखों को सर्कुलर जारी करें कि जमानत अर्जियो में लापरवाही न हो

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत अर्जियों पर पुलिस की ओर से जानकारी आने में देरी पर नाराज़गी जताई है। इससे याचिकाओं के निस्तारण में बेवजह विलम्ब होता है। कोर्ट ने डीजीपी को सर्कुलर जारी कर सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश देने को कहा कि जानकारी भेजने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न की जाए। यदि ऐसा होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने बलिया के विनोद राम की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी की स्वतंत्रता को सिर्फ इसलिए कम नहीं किया जा सकता कि पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को ज़रूरी जानकारी देने में लापरवाही की। याची के मामले में आठ अक्टूबर 2028 को सुनवाई में अपर शासकीय अधिवक्ता को जांच और अगवा किए गए व्यक्ति की बरामदगी के बारे में जानकारी प्राप्त करने को कहा गया। 17 नवंबर 2025 को कोर्ट को बताया गया कि बलिया के एसएसपी को पत्र भेजने के बावजूद कोई इंस्ट्रक्शन नहीं भेजा गया। इस देरी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने एसएसपी बलिया को तलब किया। कोर्ट के आदेश पर उपस्थित एसएसपी ओम वीर सिंह ने 25 नवंबर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया कि उन्हें पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद जांच अधिकारी ने ज़रूरी इंस्ट्रक्शन नहीं पहुंचाया। इस पर संबंधित एस आई के खिलाफ जांच शुरू की गई और जांच तक के लिए उसे सस्पेंड कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि याची की ज़मानत अर्जी सिर्फ जांच अधिकारी की लापरवाही के कारण एक महीने से ज़्यादा समय तक निस्तारित नहीं की जा सकी। इससे याची की आज़ादी छीन ली गई और जमानत का केस होने के बावजूद वह एक महीने से ज़्यादा समय तक बेवजह जेल में रहा।कोर्ट ने याचिका की मेरिट के आधार पर याची की ज़मानत मंजूर कर ली। साथ ही भविष्य में इस देरी को रोकने के लिए डीजीपी को सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया।

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