दिल की धड़कनें बताती हैं आपकी मेंटल हेल्थ, जानें दिल से दिमाग का गहरा कनेक्शन…

दिल की धड़कनें बताती हैं आपकी मेंटल हेल्थ, जानें दिल से दिमाग का गहरा कनेक्शन…

Healthy Heart Brain Connection: ‘दिल का सच’ सीरीज के पार्ट 1 में आपने जाना कि हार्ट अटैक का चौंकाने वाला इतिहास कि कैसे अमेरिका के डाइट प्लान ने दुनियाभर को हार्ट अटैक के जाल में फंसाया। भारत में कैसे अचानक दिल के मरीज बढ़े। आज इसी सीरीज के पार्ट 2 में जानें दिल और दिमाग के बीच कितना गहरा है कनेक्शन… अगर हम आपसे पूछे की क्या है आपका दिल तो आप क्या कहेंगे? आपका जवाब कितना सही? जानने के लिए जरूर पढ़ें patrika.com पर संजना कुमार की ‘Dil ka Sach’ Seris Part- 2

जरा सोचिए और बताइए – दिल क्या है?

दिल क्या है? तो आपका जवाब क्या होगा… यही न कि यह शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पंप के रूप में काम करता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी आधुनिक विज्ञान कहता है एक पंप से बढ़कर कहीं ज्यादा है आपके शरीर में आपके दिल की भूमिका, हां और जटिल भी। दिल न केवल शरीर के सभी अंगों तक ब्लड, ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाता है बल्कि, यह हमारी भावनाओं और मानसिक स्थिति के साथ ही जीवनशैली से भी गहराई से जुड़ा है।

यही वजह है कि जब आप किसी व्यक्ति, जानवर या फिर किसी भी चीज से डरते हैं, घबराते हैं तो आपका दिल तेजी से धड़कने लगता है, कोई खुशी मिल जाए तो हार्ट बीट लयबद्घ हो जाती है। वहीं तनाव के दौरान दिल पर अचानक प्रेशर या दबाव सा बढ़ने लगता है। यानी दिल और दिमाग के बीच लगातार संवाद चलता रहता है और यही संवाद हमारी धड़कनों को नियंत्रित करता है।

यहां जानें दिल और दिमाग का कनेक्शन

शरीर में दिल और दिमाग के बीच एक विशेष नर्व काम करती है। इस नर्व को वेगस नर्व कहा जाता है। इसे दिमाग का हाईवे कहा जाता है। यह नर्व दोनों अंगों के बीच संदेशों (भावनाओं) का आदान-प्रदान करती रहती है। दिल दिमाग को लगातार सिग्नल भेजता है और दिमाग दिल को आदेश देता रहता है।

चौंका देंगे दिल के ये फैक्ट्स

1- आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल को धड़कने के लिए दिमाग के आदेश की हमेशा जरूरत नहीं होती। दरअसल दिल में एक खास तरह का सेल समूह होता है, जिसे सिनोएट्रियल नोड (SA Node) कहा जाता है। यही दिल की प्राकृतिक पेसमेकर हैं और यही दिल को इलेक्ट्रोनिकल सिग्नल बनाकर दिल की धड़कनों की शुरुआत करवाता है। यहां ध्यान देना होगा कि जैसे ही धड़कन शुरू होती है यहीं से उसका दिमाग से कनेक्शन भी शुरू हो जाता है। क्योंकि अब आगे का काम दिमाग करेगा। दिमाग का ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम दिल की गति को नियंत्रित करता है।

इसका उदाहरण देते हुए एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) के कार्डियोलॉजिस्ट विक्रम वट्टी कहते हैं कि जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो दिमाग खतरे का संदेश भेजता है और दिल तेजी से धड़कने लगता है, ताकि शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिल सके। लेकिन जब व्यक्ति शांत होता है या ध्यान करता है, तो दिल की धड़कनें सामान्य हो जाती हैं। यही कारण है दिल की धड़कनें मेंटल हेल्थ का एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा सकती हैं।

2- दिल का आलम यह है कि यह एक दिन यानी 24 घंटे में 1 लाख बार धड़कता है।

3- दिल का दिमाग की तरह ही अपना एक नर्वस सिस्टम होता है। डॉक्टर्स का कहना है कि दिल में करीब 40,000 से ज्यादा न्यूरॉन (नर्व सेल्स) होती हैं। इसलिए दिल को शरीर का ‘लिटिल ब्रेन’ भी कहा जाता है।

4- आपका दिल शरीर की सबसे मेहनती मांसपेशी माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति 70 साल जीता है, तो दिल करीब 2.5 अऱब बार धड़क चुका होता है। यह कभी रुकता नहीं दिन-रात काम करता रहता है।

5- दिल की धड़कनें भावनाओं से बदल जाती हैं।

Dil ka Sach Series Part 2 Healthy Heart heart brain connection
Dil ka Sach Series Part 2 Healthy Heart heart brain connection(patrika Creative)

6- शरीर से बाहर रहने के बाद भी कुछ समय तक दिल धड़कता रहता है। यही कारण है कि हार्ट ट्रांसप्लांट आसानी से हो पाता है।

7- दिल का अपना इलेक्ट्रिक नेटवर्क होता है। यही इलेक्ट्रिक सिस्टम धड़कनों की शुरुआत करवाता है और उसे बरकरार बनाए रखता है।

8- कई अध्ययन बताते हैं कि हंसने से दिल मजबूत होता है, क्योंकि हंसी से ब्लड वेसल्स रिलैक्स होती हैं और दिल पर दबाव कम होता है। इसलिए हंसी को दिल की दवा कहा जाता है।

9- आपके फिंगर प्रिंट की तरह आपकी अपनी ही होती हैं आपके दिल की धड़कनें। इसीलिए वैज्ञानिक इसे आपकी पहचान के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

10- एक्सरसाइज से दिल का आकार शरीर के मुताबिक बना रहता है। एक्सरसाइज करने वाले लोगों का दिल थोड़ा मजबूत और प्रभावी पंप बन जाता है।

11-ब्लड वेसल्स की लंबाई हजारों किमी तक होती है। अगर इन्हें आपस में जोड़ा जाए तो इनकी कुल लंबाई 96000 किमी तक हो सकती है।

धड़कन का पैटर्न बता देता है शरीर की सेहत का हाल

डॉ. विक्रम बताते हैं कि वैज्ञानिक दिल की धड़कनों का अध्ययन Heart Rate Variability (HRV) के माध्यम से करते हैं। HRV का मतलब है दो धड़कनों के बीच समय का अंतर। यदि धड़कनों के बीच समय में लचीलापन और संतुलन बनता दिखता है, तो इसका अर्थ है कि दिल और दिमाग के बीच का तालमेल अच्छा है। लेकिन अगर धड़कनें अनियमित होती हैं या तनावपूर्ण पैटर्न में चलती हैं, तो ये व्यक्ति के शरीर में तनाव और मानसिक दबाव का इशारा हो सकता है। उनका कहना है कि लगातार तनाव में रहने वाले लोगों में HRV अक्सर कम पाया जाता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

Dil Ka sach Series Part 2
Dil Ka sach Series Part 2 (photo:freepik)

कब बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा

नसों में प्लाक बनने की स्थिति को एथएरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो दिल की गंभीर बीमारियों की वजह बन जाती है। जब नसें प्लाक के कारण संकरी हो जाती हैं, तो उनमें ब्लड भेजने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। दिल के इस तरह प्रेशर बढ़ाने की स्थिति ही ब्लड प्रेशर बढ़ा देती है। कई बार यह प्लाक टूटकर खून के थक्कों में बदल जाता है और नस को पूरी तरह से ब्लॉक कर देता है। यदि ये स्थिति दिल तक खून पहुंचाने वाली नस में होता है, तो हार्ट अटैक हो सकता है।

कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि दिल सिर्फ शरीर का एक अंग नहीं बल्कि, एक जटिल प्रणाली है जो हमारे शरीर, दिमाग और भावनाओं को जोड़कर रखती है। आधुनिक विज्ञान अब यह समझने लगा है कि दिल की धड़कन हमारी मेंटल हेल्थ का भी संकेत देती है।

Dil ka Sach Series part 2 की इस रोचक जानकारी के बाद अब आप कभी नहीं कहेंगे कि दिल सिर्फ आपके शरीर का एक पंपिंग पार्ट है। दिल का दिमाग से इतना गहरा कनेक्शन भी है और कैसे ये बता देता है आपकी सेहत अच्छी है या खराब… ये जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगले पार्ट में हम आपको बताएंगे क्या कहती है आधुनिक चिकित्सा हार्ट अटैक से बचना है तो जानें दिल का हाल…क्या कहते हैं हमारे एक्सपर्ट्स…

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