अलवर के एससी-एसटी कोर्ट ने 10 साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी राजाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं 50 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक योगेंद्र खटाना ने बताया कि मामला 4 जून 2015 का है।मालाखेड़ा थाना क्षेत्र के क्रॉसका गांव निवासी मृतक राजेंद्र के पिता रामपाल के घर उस दिन मुरारी और खेमचंद आए और उलाहना देने लगे कि “तुम्हारे लड़के ने हमारे साथ गाली-गलौज की है।” इनके साथ ही मुलजिम राजाराम भी आया था। शाम तक जब राजेंद्र घर नहीं लौटा, तो परिवार ने पहले राजाराम से ही पूछा कि राजेंद्र कहां है। इस पर राजाराम ने कहा मैं तो उसे जंगल में ही उतारकर आ गया था।यही बात परिजनों को संदिग्ध लगी और उन्होंने उसी दिन मालाखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया। परिजनों के अनुसार राजेंद्र बाइक से पांडुपोल हनुमानजी मंदिर गया था और उसके पास करीब ₹1 लाख नकद और चेक भी थे। जमीन बिकने के बाद हनुमान मंदिर पर दर्शन करने गया था। पुलिस ने राजाराम को डिटेन किया। पूछताछ में राजाराम ने पूरा जुर्म कबूल किया। उसने बताया कि उसने राजेंद्र का गला घोंटकर हत्या की, और पहचान छिपाने के लिए लाश को सरिस्का के जंगल में पत्थरों से ढक दिया, ताकि किसी को पता न चले। आरोपी ने उसकी जेब से एक लाख रुपये पार कर लिए थे।जो राजेंद्र के पास जमीन बिकने के बाद आए थे जो उसकी जेब मे ही थे। अगले दिन पुलिस राजाराम को लेकर मौके पर पहुंची, जहां सरिस्का के जंगल में राजेंद्र की डेड बॉडी पत्थरों से ढकी हुई मिली। बाइक भी वहीं बरामद हुई।राजेंद्र के पास मौजूद करीब ₹1 लाख में से ₹30,000 पुलिस ने आरोपी से बरामद किए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया। एससी-एसटी कोर्ट ने 32 गवाहों की सुनवाई के बाद मुलजिम राजाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।मृतक राजेंद्र और आरोपी राजाराम दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे।


