संसद में सरकार का खुलासा: 8 महीने, 10 लाख लोग और 805 करोड़ की ठगी… ऐसे रखें खुद को सेफ

संसद में सरकार का खुलासा: 8 महीने, 10 लाख लोग और 805 करोड़ की ठगी… ऐसे रखें खुद को सेफ

UPI Fraud News: आपकी जेब में रखा फोन आजकल बटुए से ज्यादा कीमती हो गया है, क्योंकि अब सारा लेन-देन यहीं से होता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपकी यही सहूलियत साइबर ठगों के लिए सोने की खान बन गई है? संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने जो आंकड़े रखे हैं, वो किसी को भी डराने के लिए काफी हैं। महज इस साल नवंबर तक साइबर अपराधियों ने देश की जनता को 805 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया है।

805 Crore UPI Scam: आंकड़ों की जुबानी, ठगी की कहानी

सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यूपीआई (UPI) फ्रॉड को लेकर एक लिखित जवाब दिया। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) में नवंबर महीने तक ही 805 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। इस दौरान 10.64 लाख लोग इसका शिकार बने हैं।

अगर हम पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो तस्वीर थोड़ी साफ होती है।

  • वित्तीय वर्ष 2023-24: इस साल ठगी अपने चरम पर थी, जब 1,087 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी (मामले – 13.42 लाख)।
  • वित्तीय वर्ष 2024-25: इसके बाद थोड़ी राहत मिली और आंकड़ा घटकर 981 करोड़ रुपये पर आ गया (मामले -12.64 लाख)।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 (नवंबर तक): अभी तक 805 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।

सरकार का कहना है कि अगर हम पिछले दो सालों से तुलना करें, तो धोखाधड़ी की रकम में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन खतरा अभी भी बहुत बड़ा है।

805 Crore UPI Scam

क्यों नहीं रुक रही ठगी? वजह भी जान लीजिए

सरकार ने साफ किया है कि यूपीआई सिस्टम में कोई खराबी नहीं है। मंत्री ने बताया कि डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या बेतहाशा बढ़ रही है, इसलिए ठगों को ज्यादा मौके मिल रहे हैं। अकेले नवंबर महीने की बात करें, तो देश में 20.47 अरब (Billion) बार यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिनकी वैल्यू 26.32 लाख करोड़ रुपये थी। इतनी बड़ी भीड़ में ठग लोगों को बातों में फंसाकर या फर्जी लिंक भेजकर अपना शिकार बना रहे हैं।

Cyber Crime Helpline Number 1930: सरकार ने लगाया ‘AI’ का पहरा

आपकी मेहनत की कमाई बचाने के लिए अब सरकार भी फुल एक्शन में है।

  • चक्षु (Chakshu) पोर्टल: अगर आपके पास ठगी वाली कॉल या मैसेज आए, तो आप चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट कर सकते हैं।
  • हेल्पलाइन 1930: ठगी होते ही इस नंबर पर कॉल करना सबसे बड़ा बचाव है।

Digital Payment Safety Tips: पत्रिका अलर्ट – अपनी सुरक्षा अपने हाथ

साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो बचाव का सिर्फ एक ही मंत्र ‘सतर्कता’ है। याद रखें, यूपीआई पिन का इस्तेमाल सिर्फ पैसा भेजने के लिए होता है, लेने के लिए नहीं। कोई भी अनजान लिंक क्लिक न करें और न ही किसी को अपना ओटीपी (OTP) बताएं। थोड़ी सी सावधानी आपको इन आंकड़ों का हिस्सा बनने से बचा सकती है।

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