जब घर की एकमात्र कमाने वाली मां अचानक दुनिया छोड़ जाती है, तो सिर्फ एक इंसान नहीं जाता, बल्कि पूरा परिवार अनिश्चित भविष्य के अंधेरे में चला जाता है। टीकमगढ़ जिला अस्पताल में संविदा एएनएम के पद पर कार्यरत कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद कुछ ऐसा ही हुआ। मां के जाने से घर की जिम्मेदारियां, भाई की पढ़ाई और बीमार पिता की देखभाल, सब कुछ एक साथ उनकी बेटी जानकी नामदेव के कंधों पर आ गया। महीनों तक दर-दर भटकने, दफ्तरों के चक्कर लगाने और टूटती उम्मीदों के बीच जब जानकी को नौकरी का नियुक्ति पत्र मिला, तो यह सिर्फ एक कागज नहीं था, बल्कि परिवार के लिए दोबारा जीने का सहारा बन गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश की संविदा नीति के तहत यह पहली अनुकंपा नियुक्ति है, जिसने एक परिवार को फिर से खड़े होने की ताकत दी है। जानकी की जुबानी दर्द और राहत की कहानी
जानकी नामदेव बताती हैं कि हमारे घर में मां ही कमाने वाली थीं। उनकी सैलरी से भाई की पढ़ाई चल रही थी, वह अभी कक्षा 10 में है। पापा बीमार रहते हैं, उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या है। मां के जाने के बाद घर की हालत बहुत खराब हो गई थी। कोई आय का स्रोत नहीं था। उन्होंने बताया कि इन चार महीनों में नौकरी के लिए 20 से ज्यादा चक्कर लगाए। हर बार उम्मीद रहती थी कि शायद आज कुछ हो जाए। जब मंगलवार को नियुक्ति पत्र मिला तो ऐसा लगा जैसे जिंदगी दोबारा शुरू हो गई हो। संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मध्यप्रदेश ने 1 अप्रैल से लागू किए गए नए एचआर मैनुअल में संविदा कर्मचारियों के हित में कई अहम बदलाव किए हैं। अब हर साल संविदा अनुबंध के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के अनुसार वार्षिक वेतन वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है। जिला स्वास्थ्य समिति के स्तर पर जिले के भीतर स्थानांतरण की सुविधा भी लागू की गई है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी। अनुकंपा नियुक्ति: संविदा नीति का ऐतिहासिक फैसला
संविदा नीति में सबसे बड़ा और संवेदनशील बदलाव यह है कि अब किसी भी संविदा कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु पर उसके परिवार को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार मिलेगा। इससे पहले ऐसी स्थिति में केवल अनुग्रह राशि दी जाती थी, लेकिन अब मृतक कर्मचारी के आश्रित को विकल्प दिया है कि वह अनुग्रह राशि या अनुकंपा नियुक्ति में से किसी एक का चयन कर सकता है। पात्रता की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति देने का अधिकार मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश को सौंपा गया है। 32 हजार कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 32 हजार से अधिक संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। बीते सालों में कई कर्मचारियों की आकस्मिक मृत्यु के मामले सामने आए, जिनमें परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। नई नीति ऐसे ही परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बनकर आई है, जिससे संविदा कर्मचारियों में भी स्थायित्व और भरोसे की भावना मजबूत हुई है। टीकमगढ़ से शुरू हुई पहली मिसाल
जिला चिकित्सालय टीकमगढ़ में संविदा एएनएम के पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी की 2 जुलाई 2025 को आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी आश्रित पुत्री जानकी नामदेव ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर जानकी को संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति प्रदान की गई। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के इतिहास की पहली अनुकंपा नियुक्ति है। नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि मिशन अपने सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। संविदा कर्मचारियों के सामने विपरीत परिस्थितियां आने पर मिशन उनके साथ खड़ा है और उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा। विभागीय मंत्री और उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, प्रमुख सचिव संदीप यादव और आयुक्त तरुण राठी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय मध्यप्रदेश शासन की कर्मचारी हितैषी नीतियों को दर्शाता है। उन्होंने इसे संविदा कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम बताया।


