Eid-Ul-Adha 2026: ईद-उल-अजहा से कुछ दिन पहले असम में कुर्बानी को लेकर सियासत तेज हो गई है। इसी बीच प्रदेश की कई ईदगाह कमेटियों ने लोगों से बकरीद पर गाय की कुर्बानी से परहेज करने और त्योहार के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। बता दें कि कमेटियों की तरफ से यह अपील ऐसे समय आई है जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी शनिवार को इसी तरह की अपील की थी।
‘नियमों का किया जाएगा पालन’
धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी ने लोगों से शांतिपूर्ण, कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ ईद-उल-अजहा मनाने का आग्रह किया। मुस्लिम बहुल धुबरी जिले की इस कमेटी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पशु कुर्बानी को लेकर बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि असम कैटल प्रिजर्वेशन एक्ट के तहत गाय की कुर्बानी प्रतिबंधित है और नियमों के उल्लंघन पर जेल और आर्थिक दंड जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है। साथ ही लोगों से केवल निर्धारित स्थानों पर कुर्बानी करने, साफ-सफाई बनाए रखने और सार्वजनिक मर्यादा का पालन करने को कहा गया।
सोशल मीडिया पर शेयर ना करें कुर्बानी की तस्वीरें
कमेटी ने यह भी अपील की कि पशु कुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न किए जाएं, क्योंकि इससे अन्य समुदायों की भावनाएं आहत हो सकती हैं और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
बयान में बकरीद को त्याग, करुणा और एकता का प्रतीक बताते हुए समाज के सभी वर्गों से शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की गई। प्रशासन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग करने का भी आग्रह किया गया।
CM सरमा ने की तारीफ
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी ने हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने और कानून का पालन करने के लिए लोगों से गाय की कुर्बानी से बचने की अपील की है। उन्होंने सभी ईद कमेटियों से आगे आकर काउ स्लॉटर फ्री ईद मनाने की अपील भी की।
‘इस्लाम में गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं’
इसी तरह होजाई टाउन ईदगाह कब्रिस्तान कमेटी ने भी मुस्लिम समुदाय से ईद-उल-अजहा के दौरान धार्मिक संवेदनशीलता और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की। कमेटी ने कहा कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी अनिवार्य नहीं है।
धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष ने प्रेस बयान में कहा कि हमने ईद के दौरान गाय की कुर्बानी नहीं देने का फैसला किया है और मुस्लिम भाइयों से भी ऐसा करने की अपील की है। हमारे धर्म का उद्देश्य किसी विशेष जानवर की कुर्बानी नहीं, बल्कि मन के अंदर की ईर्ष्या और बुराइयों का त्याग करना है। हमारे धार्मिक आयोजनों से किसी दूसरे धर्म की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए।


