मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रांताध्यक्ष अशोक पांडेय ने कहा है कि राज्य सरकार लाड़ली बहना सहित अन्य योजनाओं के नाम पर मुफ्त में पैसा बांट रही है, जबकि कर्मचारियों के हितों से जुड़ा पैसा रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों का बकाया और उनके अधिकारों से जुड़ी राशि जल्द जारी की जाए। पांडेय ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से नव नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में तीन साल तक 70%, 80% और 90% कटौती के आदेश को गलत ठहराए जाने के बाद अब राज्य सरकार को इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आदेश केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित न रहकर प्रदेश के सभी कर्मचारियों पर लागू होना चाहिए, ताकि किसी भी कर्मचारी के वेतन में कटौती न हो। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मीडिया से चर्चा में पांडेय ने कहा कि सरकार को मुफ्त योजनाएं तत्काल बंद कर कर्मचारियों को उनका बकाया एरियर देना चाहिए, जो पिछले 20 सालों से लंबित है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को आलसी बनाने के बजाय मूलभूत विकास योजनाओं पर फंड खर्च करे, ताकि कर्मचारी पूरी क्षमता से प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें। पांडेय ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को नजीर मानते हुए सरकार को 2019 के बाद नियुक्त लाखों कर्मचारियों को इसका लाभ देना चाहिए। यदि सरकार इस पर संज्ञान नहीं लेती है, तो 13 जनवरी को मंत्रालय के सामने कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर तत्काल आदेश जारी करने की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1989 से 2003 और 2018 से 2020 के बीच की सरकारों ने कर्मचारी विरोधी फैसले लिए। बिना गलती के इंक्रीमेंट रोकने का आरोप इस मामले में वेतन कटौती से प्रभावित कर्मचारी राहुल शर्मा ने कहा कि 2019 से पहले दो साल का प्रोबेशन पीरियड होता था और इसके पूरा होते ही दो इंक्रीमेंट दिए जाते थे, लेकिन यह व्यवस्था अब बंद कर दी गई है। उन्होंने मांग की कि मध्यप्रदेश में फिर से वही व्यवस्था लागू की जाए। राहुल शर्मा ने कहा कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकारें पहले ही 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन कटौती का आदेश खत्म कर चुकी हैं, इसलिए मध्यप्रदेश सरकार को भी इसे समाप्त करना चाहिए। वहीं, कर्मचारी सागर जैन ने कहा कि 2019 में नियुक्ति के बाद से उन्हें तीन इंक्रीमेंट का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से उन्हें खुशी मिली है और अब सरकार को जल्द से जल्द इसे लागू कर रोके गए इंक्रीमेंट देने चाहिए। सागर जैन ने कहा कि सामान्यतः इंक्रीमेंट रोकना किसी गलती पर दंड के रूप में किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश में बिना किसी गलती के ही इंक्रीमेंट नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को खत्म करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आदेश जारी नहीं हो सके। अब उन्हें मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार से इस मामले में ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।


