भोजपुर में बुधवार को रमना मैदान गेट के पास झुग्गी-झोपड़ी और फुटपाथी दुकानदारों को बगैर ऑप्शनल व्यवस्था उजाड़ने के खिलाफ भाकपा-माले ने राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया। इसके तहत भोजपुर के पीड़ित परिवारों और माले नेताओं ने आरा में एक दिवसीय धरना आयोजित किया। कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर नहीं, पर्चा दो, रोजी-रोटी की सुरक्षा दो जैसे नारे लगाकर बिहार सरकार के खिलाफ जमकर विरोध जताया। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार मौजूद थे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के आशियाने और आजीविका पर बुलडोजर चलाकर उन्हें असुरक्षा की ओर धकेल रही है। उनका कहना था कि बिना पुनर्वास और बिना ऑप्शनल बाजार की व्यवस्था के फुटपाथी दुकानदारों को हटाना अमानवीय कदम है। यूपी की तर्ज पर बुलडोजर राज धरना को संबोधित करते हुए अगिआंव विधानसभा के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद पूरे बिहार में गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तेज हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी की तर्ज पर बिहार में भी बुलडोजर राज लागू करने की कोशिश की जा रही है। रंजन ने कहा कि पिछले 20 सालों में राज्य सरकार भूमिहीन गरीबों को गांव में 5 डिसमिल और शहर में 3 डिसमिल जमीन नहीं दे सकी। सरकारी सर्वेक्षण में भी स्पष्ट हुआ है कि राज्य की दो-तिहाई आबादी अत्यंत गरीब है, लेकिन उन्हें वादा किए गए दो-दो लाख रुपए की सहायता भी अब तक नहीं मिली। नेताओं ने मांग की कि गांव के सभी भूमि–गरीबों को पांच डिसमिल और शहर के गरीबों को तीन डिसमिल जमीन आवंटित की जाए। साथ ही शहरों में फुटपाथी दुकानदारों के लिए ऑप्शनल बाजार की व्यवस्था की जाए। माले नेताओं ने कहा कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। धरने में शामिल नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज हमने धरना दिया है, कल बुलडोजर का खुला विरोध करेंगे। भोजपुर में बुधवार को रमना मैदान गेट के पास झुग्गी-झोपड़ी और फुटपाथी दुकानदारों को बगैर ऑप्शनल व्यवस्था उजाड़ने के खिलाफ भाकपा-माले ने राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया। इसके तहत भोजपुर के पीड़ित परिवारों और माले नेताओं ने आरा में एक दिवसीय धरना आयोजित किया। कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर नहीं, पर्चा दो, रोजी-रोटी की सुरक्षा दो जैसे नारे लगाकर बिहार सरकार के खिलाफ जमकर विरोध जताया। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार मौजूद थे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के आशियाने और आजीविका पर बुलडोजर चलाकर उन्हें असुरक्षा की ओर धकेल रही है। उनका कहना था कि बिना पुनर्वास और बिना ऑप्शनल बाजार की व्यवस्था के फुटपाथी दुकानदारों को हटाना अमानवीय कदम है। यूपी की तर्ज पर बुलडोजर राज धरना को संबोधित करते हुए अगिआंव विधानसभा के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद पूरे बिहार में गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तेज हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी की तर्ज पर बिहार में भी बुलडोजर राज लागू करने की कोशिश की जा रही है। रंजन ने कहा कि पिछले 20 सालों में राज्य सरकार भूमिहीन गरीबों को गांव में 5 डिसमिल और शहर में 3 डिसमिल जमीन नहीं दे सकी। सरकारी सर्वेक्षण में भी स्पष्ट हुआ है कि राज्य की दो-तिहाई आबादी अत्यंत गरीब है, लेकिन उन्हें वादा किए गए दो-दो लाख रुपए की सहायता भी अब तक नहीं मिली। नेताओं ने मांग की कि गांव के सभी भूमि–गरीबों को पांच डिसमिल और शहर के गरीबों को तीन डिसमिल जमीन आवंटित की जाए। साथ ही शहरों में फुटपाथी दुकानदारों के लिए ऑप्शनल बाजार की व्यवस्था की जाए। माले नेताओं ने कहा कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। धरने में शामिल नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज हमने धरना दिया है, कल बुलडोजर का खुला विरोध करेंगे।


