बोकारो स्टील सिटी के सम्पदा न्यायालय के आदेश के बाद मंगलवार सुबह सिटी सेंटर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हुआ। न्यायालय ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया था कि सिटी सेंटर की सड़कों के दोनों ओर और बाजार परिसर के भीतर मौजूद सभी अवैध कब्जों को सात दिनों के भीतर स्वयं हटा लिया जाए। निर्धारित अवधि समाप्त होने पर सम्पदा पदाधिकारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और बीएसएल प्रशासन ने यह कार्रवाई की। कुछ दुकानदारों ने विरोध करने का प्रयास किया इस अभियान के तहत मजदूर मैदान से लेकर मारुति शोरूम तक लगभग 400 अवैध गुमटियों, ठेलों और दुकानों को बुलडोज़र चलाकर हटाया गया। कई स्थानों पर दुकानदारों ने कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अपना सामान सड़क पर निकाल लिया था। आनंद-खनन इलाके में भी लगभग 400 दुकानें हटाई गईं। कुछ दुकानदारों ने विरोध करने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के कारण वे सफल नहीं हो सके। अधिकारियों ने बताया कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कई लोग अवैध कब्जों को खाली नहीं कर रहे थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाना पड़ा। सम्पदा न्यायालय द्वारा पारित बेदखली आदेश के अनुसार, अवैध निर्माणों को हटाने की पूरी जिम्मेदारी कब्जाधारकों की थी, और किसी भी नुकसान के लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे। पुलिस की पुख्ता व्यवस्था के कारण किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी अभियान के दौरान क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा, हालांकि पुलिस की पुख्ता व्यवस्था के कारण किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर को अतिक्रमण-मुक्त बनाने की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। इस संबंध में डीजीएम, सिक्योरिटी कर्नल राजेंद्र सिंह शेखावत ने जानकारी दी। बोकारो स्टील सिटी के सम्पदा न्यायालय के आदेश के बाद मंगलवार सुबह सिटी सेंटर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हुआ। न्यायालय ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया था कि सिटी सेंटर की सड़कों के दोनों ओर और बाजार परिसर के भीतर मौजूद सभी अवैध कब्जों को सात दिनों के भीतर स्वयं हटा लिया जाए। निर्धारित अवधि समाप्त होने पर सम्पदा पदाधिकारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और बीएसएल प्रशासन ने यह कार्रवाई की। कुछ दुकानदारों ने विरोध करने का प्रयास किया इस अभियान के तहत मजदूर मैदान से लेकर मारुति शोरूम तक लगभग 400 अवैध गुमटियों, ठेलों और दुकानों को बुलडोज़र चलाकर हटाया गया। कई स्थानों पर दुकानदारों ने कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अपना सामान सड़क पर निकाल लिया था। आनंद-खनन इलाके में भी लगभग 400 दुकानें हटाई गईं। कुछ दुकानदारों ने विरोध करने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के कारण वे सफल नहीं हो सके। अधिकारियों ने बताया कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कई लोग अवैध कब्जों को खाली नहीं कर रहे थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाना पड़ा। सम्पदा न्यायालय द्वारा पारित बेदखली आदेश के अनुसार, अवैध निर्माणों को हटाने की पूरी जिम्मेदारी कब्जाधारकों की थी, और किसी भी नुकसान के लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे। पुलिस की पुख्ता व्यवस्था के कारण किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी अभियान के दौरान क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा, हालांकि पुलिस की पुख्ता व्यवस्था के कारण किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर को अतिक्रमण-मुक्त बनाने की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। इस संबंध में डीजीएम, सिक्योरिटी कर्नल राजेंद्र सिंह शेखावत ने जानकारी दी।


