शेखपुरा में आयोजित जेंडर सेंसिटिव रिपोर्टिंग कार्यशाला में डीएम आरिफ अहसन ने कहा कि हिंसक घटना या दुर्घटना की शिकार महिलाओं को ‘पीड़िता’ नहीं ‘सर्वाइवर’ कहा जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि ‘सर्वाइवर’ शब्द महिलाओं को प्रतिकूल परिस्थितियों में समाज में टिके रहने की क्षमता प्रदान करता है। यह कार्यशाला यूएनएफपीए और पीसीआई इंडिया की ओर से मीडियाकर्मियों के लिए आयोजित की गई थी। जिला मुख्यालय स्थित एक निजी सभागार में डीएम आरिफ अहसन और एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से इस कार्यशाला का उद्घाटन किया। डीएम ने मीडिया में महिलाओं के संतुलित प्रतिनिधित्व की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाओं को सरकार, न्यायपालिका या सेवा में प्रतिनिधित्व के लिए ‘देना’ शब्द का उपयोग किया जाता है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं, और उनसे सीधा संवाद करने पर ही उनकी जमीनी स्थिति का पता चलता है। एसपी ने सामाजिक सोच में बदलाव पर दिया जोर कार्यशाला में एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने पुलिस द्वारा महिलाओं को हर प्रकार से सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क और महिला कर्मियों के लिए आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया गया है। एसपी ने सामाजिक सोच में बदलाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले निर्वाचित महिला प्रतिनिधि पंचायत बैठकों में अपने पति को भेजती थीं, लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। इस अवसर पर डीडीसी संजय कुमार, पीसीआई की अमृता मिश्रा, यूनिसेफ की प्रियंका, स्टेट हेड ख्वाजा नूर और वरिष्ठ पत्रकार मिनती सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभी स्थानीय मीडियाकर्मियों द्वारा महिलाओं के प्रति संवेदनशील और समानता पर आधारित रिपोर्टिंग के महत्व पर बल दिया। शेखपुरा में आयोजित जेंडर सेंसिटिव रिपोर्टिंग कार्यशाला में डीएम आरिफ अहसन ने कहा कि हिंसक घटना या दुर्घटना की शिकार महिलाओं को ‘पीड़िता’ नहीं ‘सर्वाइवर’ कहा जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि ‘सर्वाइवर’ शब्द महिलाओं को प्रतिकूल परिस्थितियों में समाज में टिके रहने की क्षमता प्रदान करता है। यह कार्यशाला यूएनएफपीए और पीसीआई इंडिया की ओर से मीडियाकर्मियों के लिए आयोजित की गई थी। जिला मुख्यालय स्थित एक निजी सभागार में डीएम आरिफ अहसन और एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से इस कार्यशाला का उद्घाटन किया। डीएम ने मीडिया में महिलाओं के संतुलित प्रतिनिधित्व की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाओं को सरकार, न्यायपालिका या सेवा में प्रतिनिधित्व के लिए ‘देना’ शब्द का उपयोग किया जाता है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं, और उनसे सीधा संवाद करने पर ही उनकी जमीनी स्थिति का पता चलता है। एसपी ने सामाजिक सोच में बदलाव पर दिया जोर कार्यशाला में एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने पुलिस द्वारा महिलाओं को हर प्रकार से सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क और महिला कर्मियों के लिए आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया गया है। एसपी ने सामाजिक सोच में बदलाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले निर्वाचित महिला प्रतिनिधि पंचायत बैठकों में अपने पति को भेजती थीं, लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। इस अवसर पर डीडीसी संजय कुमार, पीसीआई की अमृता मिश्रा, यूनिसेफ की प्रियंका, स्टेट हेड ख्वाजा नूर और वरिष्ठ पत्रकार मिनती सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभी स्थानीय मीडियाकर्मियों द्वारा महिलाओं के प्रति संवेदनशील और समानता पर आधारित रिपोर्टिंग के महत्व पर बल दिया।


