सीतापुर में नालों पर हुए अतिक्रमण पर चला बुलडोजर:दुकानदारों ने तहसील प्रशासन पर भेदभाव का लगाया आरोप

सीतापुर में नालों पर हुए अतिक्रमण पर चला बुलडोजर:दुकानदारों ने तहसील प्रशासन पर भेदभाव का लगाया आरोप

सीतापुर के बिसवा विकासखंड के कस्बे में मंगलवार दोपहर उपजिलाधिकारी शिखा शुक्ला के नेतृत्व में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। यह कार्रवाई रेउसा रोड स्थित सब्जी मंडी से लेकर मुख्य चौराहे होते हुए दीप होटल तक की गई। अभियान के दौरान प्रशासन ने दुकानों के सामने नालों पर रखे गए तीन-सेट, बांस-बल्ली, टीन शेड और अन्य अस्थायी सामान हटवाया। कुछ दुकानदारों द्वारा स्वयं अतिक्रमण न हटाए जाने पर प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान नालों की सफाई और यातायात को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से चलाया गया है। नालों पर अतिक्रमण के कारण जल निकासी बाधित हो रही थी, जिससे बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। हालांकि, कार्रवाई के बाद कस्बे में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नालों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है, तो कस्बे के मुख्य चौराहे पर हाल ही में बनाए गए सेल्फी पॉइंट पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यह सेल्फी पॉइंट नाले से बाहर निकलकर सड़क की ओर तक फैला हुआ है। ऐसे में नए निर्माण को अनुमति दिए जाने और पुराने अतिक्रमणों पर सख्ती दिखाने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि नालों के सामने लगे बिजली के खंभे प्रशासन को अतिक्रमण नहीं दिखते, जबकि दुकानदारों द्वारा लगाए गए टीन शेड और अस्थायी ढांचे अतिक्रमण की श्रेणी में आ जाते हैं। इससे दुकानदारों में नाराजगी देखने को मिल रही है। आम जनमानस में यह भी चर्चा है कि प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई हर साल दिसंबर और जनवरी के महीनों में ही की जाती है, जबकि बाकी समय अतिक्रमण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

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