ठंड ने दस्तक दे दी है और तापमान में लगातार गिरावट के साथ मौसमी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बीते एक सप्ताह में 30-35% तक बढ़ी है। गले में खराश, कफ, सर्दी-जुकाम और खांसी आम शिकायत बन गई है। रिम्स ओपीडी में पहुंचने वाले हर चार में से एक मरीज इन मौसमी बीमारियों से पीड़ित मिल रहे हैं। पिछले सात दिनों में केवल रिम्स की मेडिसिन ओपीडी में 1402 और पीडियाट्रिक ओपीडी में 1271 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। वहीं सदर अस्पताल की ओपीडी में भी संख्या 2194 रही। कुल 4,867 मरीजों में से लगभग 25-30% मौसमी बीमारियों से ग्रस्त थे। ठंड में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से प्रभावित होती है। शिशु रोग विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, छोटे बच्चे ठंडी हवा, धूल और वायरल संक्रमण से जल्दी प्रभावित होते हैं। वहीं, बुजुर्गों में खासतौर पर गठिया (आर्थराइटिस), सांस की दिक्कत, हार्ट रोग, ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि सुबह में तेज ठंड और शाम के बाद कोहरा बढ़ने से बुजुर्ग रोगियों की परेशानी बढ़ी है। सदर अस्पताल में शिशु रोग विभाग के बाहर लगी कतार कान दर्द से लेकर स्ट्रोक तक के मामले बढ़े रिम्स के फिजिशियन डॉ. बी. कुमार के अनुसार, ठंड की शुरुआत में शरीर तापमान के जल्द बदलाव को सहन नहीं कर पाता। इसके कारण गले में खराश, कफ और खांसी, वायरल फीवर, कान दर्द (ईयर इंफेक्शन), अस्थमा और सांस लेने में दिक्कत, हार्ट पेशेंट्स में ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव और स्ट्रोक के केस में बढ़ोतरी होती है। ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है। इधर, रिम्स के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी विभाग में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के कारण ब्लड वेसेल सिकुड़ती हैं, जिससे हार्ट और ब्रेन से जुड़ी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। एक्सपर्ट की सलाह सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें, पानी पीते रहें, गुनगुने पेय व भाप जरूरी डॉ. बी. कुमार, हेड, मेडिसिन विभाग, रिम्स सुबह और देर शाम बाहर निकलने से बचें। ठंडी हवा सीधे श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। गुनगुना पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें। बच्चों को ठंडी चीज़ें न दें और बुजुर्ग बीपी की दवा समय पर लें। डॉ. प्रशांत कुमार, कार्डियोलॉजिस्ट, रिम्स हार्ट पेशेंट सुबह की सैर बंद करें और धूप निकलने के बाद हल्की वॉक करें। ठंड में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, इसलिए दवा और दिनचर्या में कोई बदलाव चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करें। डॉ. जेडएम खान, ईएनटी विशेषज्ञ, रिम्स कान दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। ठंडी हवा में सीधे कान खुला न रखें। स्कार्फ या कैप से ढकें। नाक बंद रहने पर भाप बेहद फायदेमंद है। डॉ. राजीव मिश्रा, हेड, बाल रोग विभाग, रिम्स बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, लेकिन ओवर-लेयरिंग न करें। घर पर भाप देना और दिन में दो बार गुनगुना पानी पिलाना फायदा करेगा। अचानक तापमान में बदलाव (एसी से बाहर या धूप से छाया) से बचाएं। ठंड ने दस्तक दे दी है और तापमान में लगातार गिरावट के साथ मौसमी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बीते एक सप्ताह में 30-35% तक बढ़ी है। गले में खराश, कफ, सर्दी-जुकाम और खांसी आम शिकायत बन गई है। रिम्स ओपीडी में पहुंचने वाले हर चार में से एक मरीज इन मौसमी बीमारियों से पीड़ित मिल रहे हैं। पिछले सात दिनों में केवल रिम्स की मेडिसिन ओपीडी में 1402 और पीडियाट्रिक ओपीडी में 1271 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। वहीं सदर अस्पताल की ओपीडी में भी संख्या 2194 रही। कुल 4,867 मरीजों में से लगभग 25-30% मौसमी बीमारियों से ग्रस्त थे। ठंड में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से प्रभावित होती है। शिशु रोग विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, छोटे बच्चे ठंडी हवा, धूल और वायरल संक्रमण से जल्दी प्रभावित होते हैं। वहीं, बुजुर्गों में खासतौर पर गठिया (आर्थराइटिस), सांस की दिक्कत, हार्ट रोग, ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि सुबह में तेज ठंड और शाम के बाद कोहरा बढ़ने से बुजुर्ग रोगियों की परेशानी बढ़ी है। सदर अस्पताल में शिशु रोग विभाग के बाहर लगी कतार कान दर्द से लेकर स्ट्रोक तक के मामले बढ़े रिम्स के फिजिशियन डॉ. बी. कुमार के अनुसार, ठंड की शुरुआत में शरीर तापमान के जल्द बदलाव को सहन नहीं कर पाता। इसके कारण गले में खराश, कफ और खांसी, वायरल फीवर, कान दर्द (ईयर इंफेक्शन), अस्थमा और सांस लेने में दिक्कत, हार्ट पेशेंट्स में ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव और स्ट्रोक के केस में बढ़ोतरी होती है। ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है। इधर, रिम्स के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी विभाग में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के कारण ब्लड वेसेल सिकुड़ती हैं, जिससे हार्ट और ब्रेन से जुड़ी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। एक्सपर्ट की सलाह सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें, पानी पीते रहें, गुनगुने पेय व भाप जरूरी डॉ. बी. कुमार, हेड, मेडिसिन विभाग, रिम्स सुबह और देर शाम बाहर निकलने से बचें। ठंडी हवा सीधे श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। गुनगुना पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें। बच्चों को ठंडी चीज़ें न दें और बुजुर्ग बीपी की दवा समय पर लें। डॉ. प्रशांत कुमार, कार्डियोलॉजिस्ट, रिम्स हार्ट पेशेंट सुबह की सैर बंद करें और धूप निकलने के बाद हल्की वॉक करें। ठंड में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, इसलिए दवा और दिनचर्या में कोई बदलाव चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करें। डॉ. जेडएम खान, ईएनटी विशेषज्ञ, रिम्स कान दर्द के मामले बढ़ रहे हैं। ठंडी हवा में सीधे कान खुला न रखें। स्कार्फ या कैप से ढकें। नाक बंद रहने पर भाप बेहद फायदेमंद है। डॉ. राजीव मिश्रा, हेड, बाल रोग विभाग, रिम्स बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, लेकिन ओवर-लेयरिंग न करें। घर पर भाप देना और दिन में दो बार गुनगुना पानी पिलाना फायदा करेगा। अचानक तापमान में बदलाव (एसी से बाहर या धूप से छाया) से बचाएं।


