गोमती नदी को फिर से साफ और जीवनदायिनी बनाने के लिए एक अहम रणनीतिक सम्मेलन आयोजित किया गया। इस बैठक का आयोजन उत्तर प्रदेश राज्य परिवर्तन आयोग ने किया। “जीवनरेखा का पुनर्जीवन: स्वच्छ गोमती” विषय पर हुए इस सम्मेलन में सरकारी अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, विकास से जुड़े साझेदार और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उद्देश्य साफ था-लखनऊ की पहचान बनी गोमती को प्रदूषण से मुक्त कर टिकाऊ तरीके से पुनर्जीवित करना। सेना ने निभाई सक्रिय भागीदारी की बात सम्मेलन को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी-इन-सी, भारतीय सेना की मध्य कमान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल सामाजिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना, प्रशासन और आम जनता अगर मिलकर काम करें तो गोमती जैसी नदियों को बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेना राष्ट्र निर्माण के तहत पर्यावरण अभियानों में सक्रिय सहयोग के लिए तैयार है। टेरिटोरियल आर्मी के मॉडल पर जोर बैठक में टेरिटोरियल आर्मी के पारिस्थितिक कार्य बलों (इकोलॉजिकल टास्क फोर्स) के काम का जिक्र किया गया। बताया गया कि इन बलों ने देश के कई हिस्सों में नदी संरक्षण, वनीकरण और भूमि सुधार में सराहनीय काम किया है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इसी अनुशासित मॉडल को गोमती के पुनर्जीवन में भी लागू किया जा सकता है। वैश्विक संस्थानों का भी मिलेगा सहयोग सम्मेलन में विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की भागीदारी भी रही। इन संस्थाओं ने तकनीकी मदद और वित्तीय सहयोग देने की बात कही, ताकि योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीन पर भी असर दिखे। प्रदूषण नियंत्रण और जनजागरूकता पर फोकस अंत में यह सहमति बनी कि गोमती को साफ और स्वस्थ बनाने के लिए एक साझा और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें सीवेज प्रबंधन को मजबूत करना, नदी में गिरने वाले कचरे और गंदे पानी पर रोक लगाना, हरित क्षेत्र बढ़ाना और लोगों को जागरूक करना प्रमुख कदम होंगे।


