यमुनानगर की आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज बुधवार को जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन रजिस्टर्ड 1442 के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ जोरदार रोष जताया। धरना जिला प्रधान कमलेश देवी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसमें छछरौली, रादौर, बिलासपुर, जगाधरी ग्रामीण और मुस्तफाबाद सहित विभिन्न ब्लॉकों से आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स पहुंचीं। मानदेय न मिलने पर बढ़ी आर्थिक तंगी प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण उन्हें पिछले कई महीनों से मानदेय नहीं मिल रहा है। केंद्रीय हिस्से का भुगतान सात महीने से लंबित है, जबकि राज्य सरकार की ओर से मार्च महीने का मानदेय भी अब तक जारी नहीं किया गया है। आंगनवाड़ी प्रधान ने बताया कि यह समय परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का होता है, जब बच्चों के दाखिले, कॉपियां और किताबों पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में मानदेय न मिलने से उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का किराया पिछले डेढ़ साल से वर्कर्स अपनी जेब से भर रही हैं, जबकि गैस सिलेंडर का खर्च भी पिछले दो वर्षों से नहीं मिला है। समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि योजनाओं की घोषणाएं तो बड़े स्तर पर की जाती हैं, लेकिन उनका लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचता। धरने के दौरान जिला प्रधान कमलेश देवी ने कहा कि सरकार केवल घोषणाएं करती है, लेकिन आंगनवाड़ी वर्कर्स को समय पर मानदेय नहीं मिलता। सात-सात महीने तक भुगतान लंबित रहने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग्स का किराया और गैस का खर्च वर्कर्स को अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है, जिसका भुगतान भी नहीं किया जा रहा। धरने के अंत में महिलाओं ने डीसी के माध्यम से अपनी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


