भास्कर संवाददाता | रायसेन औबेदुल्लागंज विकासखंड के ग्राम टिगरिया निवासी अमृता कुमरे ने अपनी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है। कभी सालभर में महज 50 हजार रुपये कमाने वाली अमृता आज सब्जी और फूलों की खेती से डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। शुरुआत में सिंचाई और संसाधनों की कमी के कारण खेती में मनचाहा उत्पादन नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान गांव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक मजबूती मिलती देख अमृता ने भी महिला शक्ति स्व-सहायता समूह बनाया और बचत शुरू की। समूह के माध्यम से घर के छोटे-मोटे खर्च निकलने लगे, लेकिन आय बढ़ाने के लिए नया विकल्प जरूरी था। एसआरएलएम से जैविक खेती और पोषण वाटिका का प्रशिक्षण मिलने के बाद अमृता ने खेती की पद्धति बदली। जैविक खाद से लागत कम हुई और उत्पादन बढ़ा। अब वे सब्जी और फूलों की उन्नत खेती कर रही हैं, जिससे अच्छी मासिक बचत होने लगी है।


