अमेरिका (United States Of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पदभार संभालते ही कई बड़े फैसले लिए। ट्रंप पूरी तरह से एक्टिव नज़र आ रहे हैं और एक के बाद एक बड़े आदेश दे रहे हैं। ट्रंप ने एक और आदेश दिया है। जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक डिजिटल एसेट वर्किंग ग्रुप बनाने का आदेश दिया है जो क्रिप्टोकरेंसी के अमेरिकी रणनीतिक भंडार की संभावनाओं की रिसर्च करेगा। ऐसे में मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि अमेरिका ऐसा क्यों कर रहा है? आखिर क्यों अमेरिका बिटकॉइन का रणनीतिक भंडार बना रहा है? आइए नज़र डालते हैं।
क्या होता है रणनीतिक भंडार?
रणनीतिक भंडार किसी महत्वपूर्ण संसाधन का भंडार है जिसे संकट या आपूर्ति में व्यवधान के समय जारी किया जा सकता है। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण यूएस स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व है, जो आपातकालीन कच्चे तेल की दुनिया की सबसे बड़ी आपूर्ति है। इसी तरह कनाडा के पास मेपल सिरप का विश्व में एकमात्र रणनीतिक भंडार है, जबकि भारत के पास गोल्ड, तेल के भंडार हैं। चीन के पास धातुओं, अनाजों और पोर्क उत्पादों के रणनीतिक भंडार हैं।
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कितना है मौजूदा अमेरिकी भंडार?
अमेरिकी सरकार के पास कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त किए गए लगभग 2,00,000 बिटकॉइन हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 21 अरब डॉलर है। यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार भंडार के लिए खुले बाजार से और बिटकॉइन खरीदेगी या केवल जब्त संपत्ति का प्रबंधन करेगी। एक विधेयक के अनुसार ट्रेजरी पांच साल तक हर साल 2,00,000 बिटकॉइन खरीदेगी, जिससे कुल 10 लाख बिटकॉइन का भंडार बनेगा, जो वैश्विक आपूर्ति का 5% होगा। इसे 20 साल तक बनाए रखा जाएगा।
क्या हो सकते हैं फायदे और नुकसान?
बिटकॉइन से बना रिज़र्व यूएस डॉलर को और मज़बूत कर सकता है और सरकार का कर्ज कम करने में मदद कर सकता है। यह मुद्रास्फीति से सुरक्षा दे सकता है और वैश्विक बिटकॉइन बाजार में चीन और रूस जैसे देशों पर बढ़त दिला सकता है। दूसरी ओर, बिटकॉइन अत्याधिक अस्थिर आभासी मुद्रा है और इसलिए राष्ट्रीय भंडार के लिए उपयुक्त नहीं मानी जा सकती। क्रिप्टोकरेंसी बाजार साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में सरकार द्वारा बिटकॉइन की खरीद-बिक्री से कीमतों पर भारी असर पड़ सकता है।
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