वाराणसी कोर्ट में जमानत खारिज होने पर ADGC को पीटा-लहूलुहान:डिफेंस लॉयर ने साथी बुलाकर किया हमला, 11 हमलावरों पर केस; सेंट्रल बार से निष्कासित

वाराणसी कोर्ट में जमानत खारिज होने पर ADGC को पीटा-लहूलुहान:डिफेंस लॉयर ने साथी बुलाकर किया हमला, 11 हमलावरों पर केस; सेंट्रल बार से निष्कासित

वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय की फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपराधी की जमानत का विरोध सरकारी वकील को भारी पड़ गया। अपराधी की पैरवी करने वाले अधिवक्ता ने अपने साथियों को बुलाकर अभियोजन के वकील पर हमला बोल दिया। पहले दो दिन रेकी की फिर लाइब्रेरी में जाकर लात-घूसों और डंडे से पीट दिया। अचानक हमले और पिटाई में सहायक जिला शासकीय वकील मनोज कुमार गुप्ता गंभीर रूप से चोटिल हो गए। उन्हें खून भी निकल आया और हमलावर वरिष्ठ वकील को पीटते रहे। हालांकि आसपास के अन्य वकीलों ने आकर बीच बचाव किया और विरोध भी जताया। इसके बाद बड़ी संख्या में वकील जुटे और मनोज गुप्ता का प्राथमिक उपचार कराया गया। हमले के बाद देर शाम सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई। वादी की जमानत खारिज होने के बाद अधिवक्ता सहायक जिला शासकीय वकील मनोज कुमार गुप्ता को पीटने वाले पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष को बार एसोसिएशन से निष्कासित कर दिया गया। उन पर बार की सदस्यता को लेकर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया। वहीं मनोज गुप्ता की तहरीर पर कैंट थाने में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष और वकील राहुल राज समेत 6 नामजद और 5 अज्ञात पर केस दर्ज किया गया। बताया गया कि राहुल एक राजनीतिक दल से भी जुड़ा हुआ है और इससे पहले उसके खिलाफ कई थानों में केस दर्ज हैं। बताया गया कि पहली बार किसी वकील पर दूसरे वकील ने सार्वजनिक रूप से केस को लेकर हमला बोला है। पहले जानिए पूरा विवाद और घटनाक्रम वाराणसी सेंट्रल बार एसोसिएशन के आजीवन सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गुप्ता फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 में राज्य सरकार की ओर से आपराधिक मामलों का संचालन करते हैं। कोर्ट में विशेष अभियोजन अधिकारी के तौर पर जमानत याचिकाओं पर सवाल भी उठाते हैं और कई बार उन्हें खारिज करने की अपील भी करते हैं। थाना रामनगर निवासी अंशुल केशरी और शिव केशरी समेत अन्य के खिलाफ पुलिस ने अपराध संख्या 260/ 25 के तहत BNS की धाराएं 318 (4)/423 70()1351(2)/62(2) के तहत केस दर्ज किया था और दबिश देकर दबोच लिया। 01 नवंबर को थाना रामनगर से संबंधित आरोपी अंशुल केशरी व शिव केशरी को गिरफ्तारी के बाद कोर्ट लाया गया। आरोपी अंशुल केशरी और शिव केशरी के जमानत की याचिका कोर्ट में अधिवक्ता राहुल राज ने दाखिल की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान मनोज गुप्ता ने उन दोनों को अपराधी और धाराओं को संज्ञेय होने की दलील दी। वहीं जमानत के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात कहते हुए जमानत का विरोध किया। जिस दलील पर जज ने जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपियों के वकील राहुल राज ने बचाव पक्ष रखा लेकिन जज संतुष्ट नहीं हो सके, राहुल ने अभियोजन के वकील मनोज गुप्ता पर जमानत के विरोध में दलीलें ना देने की बात कही। कोर्ट के अंदर ही गलत तरीके से रिएक्ट भी किया और जमानत खारिज होने पर धमकाते हुए कोर्ट रूम के बाहर चला गया। राजेंद्र भवन की लाइब्रेरी में घेराबंदी कर हमला 7 नवंबर को सहायक जिला शासकीय वकील मनोज कुमार गुप्ता लाइब्रेरी में किताबों का अध्ययन करने गए थे। किसी केस से संबंधित कुछ किताबों को लेकर पढ़ रहे थे तभी गेट के अंदर राहुल राज दाखिल हुआ और नाम लेकर सरकारी वकील को बुलाने लगा। उसने मनोज पर टिप्पणी की तो एडीजीसी ने उसका विरोध किया और अभद्रता ना करने की बात कही। इसके बाद मनोज गुप्ता बाहर निकलकर जाने लगे तो राहुल राज ने रास्ता रोकर अपने अन्य साथियों को बुलाया लिया। परिसर में विकास चौहान, प्रमोद मौर्या, हर्ष सोनकर, अंकित केसरी, सलमान शाही के अलावा 4-5 बाहरी लोगों ने घेराबंदी कर ली। जब तक मनोज निकलना चाहते सभी ने मिलकर हमला बोल दिया। हमलावरों ने लात-घूसों और डंडों से पिटाई की और बेहरमी से पीटते रहे। इसमें मनोज को बाहरी के अलावा आंतरिक चोटें आई। आसपास के वकीलों ने बचाव किया तो मामला शांत हुआ। हालांकि राहुल इस दौरान खुद को काशी विद्यापीठ का छात्र नेता और पूर्व अध्यक्ष बताता रहा। उसके करीबियों की माने तो एक राजनीतिक दल में अजगरा से चुनावी टिकट का प्रयास कर रहा है। सेंट्रल बार ने जारी किया निष्कासन, यूपी बार काउंसिल को भेजा पत्र हमले के बाद पीड़ित मनोज ने सेंट्रल बार के अध्यक्ष मंगलेश दुबे और महामंत्री राजेश गुप्ता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद आनन फानन में सेंट्रल बार की टीम पहुंची और मनोज को लेकर बार कार्यालय में लाया गया। सरकारी वकील पर जमानत याचिका खारिज होने के बाद हमले की जानकारी पाकर वकीलों की भीड़ जुट गई। अभियोजन और डिफेंस की व्यवस्था को दरकिनार करने वाले अधिवक्ता राहुल राज के खिलाफ कठोर कार्रवाई का मुद्दा उठा और उसे जेल भेजने की बात कही। सभी ने एकजुट होकर हमले की घोर निंदा की। साथ ही बार से निकालने और यूपी-इंडिया बार काउंसिल से पंजीकरण रद्द कराने का प्रस्ताव पास हुआ। इसके बाद तहरीर देकर कैंट थाने में अधिवक्ता राहुल राज, विकास चौहान, प्रमोद मौर्या, हर्ष सोनकर, अंकित केसरी, सलमान शाही के अलावा 4-5 बाहरी लोगों के खिलाफ केस दर्ज गया। इन 11 लोगों की तलाश में पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। अध्यक्ष मंगलेश ने बताया कि हमलावर वकील को सेंट्रल बार से निष्कासित कर दिया गया है। तीन वर्ष के लिए अवधि तय की है, जांच रिपोर्ट के बाद इसे बढ़ाया जा सकेगा।

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