फतेहाबाद जिले में टोहाना के मणियाना रोड पर वन विभाग की जमीन से 18 हरे पेड़ काटने का मामला गरमा गया है। समाजसेवी नवजोत ढिल्लो की शिकायत पर वन विभाग ने आरा मशीन संचालक प्रिंस चावला और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। वहीं, अब आरोपी प्रिंस ने जिला वन अधिकारी (डीएफओ) की जांच पर सवाल उठाए हैं। प्रिंस चावला का कहना है कि वह बेकसूर है और यह पूरा मामला वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है। उन्होंने 25 तारीख को हुई इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। प्रिंस के अनुसार, उन्होंने केवल लेबर उपलब्ध कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे एक हफ्ते से लेबर मांगी जा रही थी और मजबूरी में उन्हें लेबर देनी पड़ी। अब अधिकारियों को बचाने के लिए उनका नाम घसीटा जा रहा है। वन दरोगा लेकर गए थे ट्रैक्टर और लेबर : प्रिंस प्रिंस ने यह भी दावा किया कि उनके पास वन दरोगा सुरेंद्र चोपड़ा की व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्डिंग है। उनके मुताबिक, दरोगा यह कहकर ट्रैक्टर ले गए थे कि माल ज्यादा है और बाद में लौटा देंगे, लेकिन अब ट्रैक्टर जब्त कर लिया गया है। प्रिंस ने आरोप लगाया कि इस गड़बड़ी में विभाग की 100 प्रतिशत संलिप्तता है। उन्होंने मोरनी-पंचकूला स्टाफ की तरह यहां भी स्टाफ की मिलीभगत होने का दावा किया। उनके अनुसार, विभाग की मिलीभगत के बिना कोई एक पेड़ भी नहीं काट सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार को आए जिला वन अधिकारी ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय अपने स्टाफ का बचाव किया। वन दरोगा की शिकायत पर जांच शुरू प्रिंस ने मामले की उच्च स्तरीय कमेटी से जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि सोमवार को एक हरा ट्रैक्टर पकड़ा गया था, लेकिन अब पैसे लेकर ट्रैक्टर बदल दिया गया है। उनके अनुसार, एफआईआर केवल उनके और लेबर के खिलाफ दर्ज की गई है, जबकि असली दोषी अधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह सभी सबूत लिखित में देंगे। चंडीगढ़ रोड चौकी पुलिस ने वन दरोगा सुरेंद्र की शिकायत पर प्रिंस चावला सहित तीन नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले को मोरनी और यमुनानगर में अधिकारियों की संलिप्तता वाले ऐसे ही अन्य मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है।


