Gurindervir Singh ने 100 मीटर दौड़ में बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड, Federation Cup में जीता गोल्ड मेडल

Gurindervir Singh ने 100 मीटर दौड़ में बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड, Federation Cup में जीता गोल्ड मेडल

झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित 2026 एथलेटिक्स फेडरेशन कप में धावक गुरिंदरवीर सिंह ने कमाल कर दिया। उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ को महज 10.09 सेकंड में पूरा करके एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।अपनी इस ऐतिहासिक जीत पर गुरिंदरवीर ने कहा, “यह बहुत अच्छा एहसास है। उम्मीद है कि मैं आगे भी अच्छी ट्रेनिंग करूंगा और भविष्य में और बेहतर नतीजे लाऊंगा।” उन्होंने मानसिक मजबूती को जीत की वजह बताते हुए कहा कि आखिरी पलों में खेल शारीरिक ताकत से ज्यादा मानसिक मजबूती का होता है और कल वह खुद को मानसिक रूप से मजबूत रख पाए, जिससे यह जीत मिली।

#WATCH | Ranchi, Jharkhand: Athlete Gurindervir Singh clinched a gold medal in the men’s 100m event at the 2026 Athletics Federation Cup, with a new national record timing of 10.09 seconds, yesterday.(Source: Reliance Foundation Sports) pic.twitter.com/zFg29FooAi— ANI (@ANI) May 24, 2026

इसे भी पढ़ें: Vinesh Phogat को मिली बड़ी राहत, Delhi High Court ने Asian Games Trials में हिस्सा लेने की दी इजाजतलोग कहते थे भारतीयों के बस की बात नहींअपनी पुरानी चुनौतियों को याद करते हुए गुरिंदरवीर ने बताया, “जब आप कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, तो लोग कहते हैं कि यह नहीं हो सकता। ऐसा हर उस इंसान के साथ होता है जो कुछ बदलना चाहता है। जब मैं छोटा था, तो लोग मुझसे कहते थे कि भारतीयों में स्प्रिंटिंग और 100 मीटर रेस के लिए जरूरी जीन्स नहीं होते। लोग मुझे 400 मीटर दौड़ने की सलाह देते थे, क्योंकि मिल्खा सिंह उसके चैंपियन थे। लेकिन मेरे मन में हमेशा यह बात थी कि मुझे एक नया रास्ता बनाना है, ताकि भविष्य में लोग सोचें कि हम भी 100 मीटर में कमाल कर सकते हैं।”मां रूपिंदर कौर ने जताई खुशीगुरिंदरवीर की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनकी मां रूपिंदर कौर ने बेहद खुशी और गर्व जताया। उन्होंने कहा, “हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि हमारे बच्चे ने इतिहास रच दिया है। सभी रिश्तेदार फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह बचपन से ही बहुत खुशमिजाज था और उसके कोच भी बहुत अच्छे रहे। उसके पिता का सपना था कि वह एक एथलीट बने।” इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे अपने माता-पिता की बात सुनें, पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर ध्यान दें और नशे से पूरी तरह दूर रहें। इसे भी पढ़ें: Animesh Kujur की तूफानी दौड़, National Record तोड़कर Commonwealth Games 2026 में बनाई जगहपिता ने बताया 12 साल की मेहनत का सफरगुरिंदरवीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि उनका बेटा 12 साल की उम्र से ही इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं खुद वॉलीबॉल खेलता था और चाहता था कि मेरा बेटा भी एक खिलाड़ी बने। उसका पूरा सफर बहुत शानदार रहा है।” उन्होंने युवाओं से कहा कि खेल सेहत के साथ-साथ पंजाब और पूरे भारत के लिए बहुत जरूरी हैं। खेल के मैदान पर ही आप असल में आगे बढ़ते हैं और अपने माता-पिता व गुरुओं का नाम रोशन करते हैं।कोचों के योगदान को किया यादकमलजीत सिंह ने गुरिंदरवीर के कोचों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि गुरिंदरवीर के पहले कोच ने उससे बहुत ज्यादा मेहनत करवाई और दसवीं क्लास पूरी होने तक उसे अच्छे से ट्रेन किया। इसके बाद उसने जालंधर में कोच हैप्पी के साथ अपनी ट्रेनिंग शुरू की। कोच हैप्पी ने उसे बिल्कुल अपने बेटे की तरह अपनाया और उसे अपने परिवार के सदस्य जैसा प्यार और सहयोग दिया, जिससे वह आज इस मुकाम पर पहुंच पाया है। 

झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित 2026 एथलेटिक्स फेडरेशन कप में धावक गुरिंदरवीर सिंह ने कमाल कर दिया। उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ को महज 10.09 सेकंड में पूरा करके एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
अपनी इस ऐतिहासिक जीत पर गुरिंदरवीर ने कहा, “यह बहुत अच्छा एहसास है। उम्मीद है कि मैं आगे भी अच्छी ट्रेनिंग करूंगा और भविष्य में और बेहतर नतीजे लाऊंगा।” उन्होंने मानसिक मजबूती को जीत की वजह बताते हुए कहा कि आखिरी पलों में खेल शारीरिक ताकत से ज्यादा मानसिक मजबूती का होता है और कल वह खुद को मानसिक रूप से मजबूत रख पाए, जिससे यह जीत मिली।

इसे भी पढ़ें: Vinesh Phogat को मिली बड़ी राहत, Delhi High Court ने Asian Games Trials में हिस्सा लेने की दी इजाजत

लोग कहते थे भारतीयों के बस की बात नहीं

अपनी पुरानी चुनौतियों को याद करते हुए गुरिंदरवीर ने बताया, “जब आप कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, तो लोग कहते हैं कि यह नहीं हो सकता। ऐसा हर उस इंसान के साथ होता है जो कुछ बदलना चाहता है। जब मैं छोटा था, तो लोग मुझसे कहते थे कि भारतीयों में स्प्रिंटिंग और 100 मीटर रेस के लिए जरूरी जीन्स नहीं होते। लोग मुझे 400 मीटर दौड़ने की सलाह देते थे, क्योंकि मिल्खा सिंह उसके चैंपियन थे। लेकिन मेरे मन में हमेशा यह बात थी कि मुझे एक नया रास्ता बनाना है, ताकि भविष्य में लोग सोचें कि हम भी 100 मीटर में कमाल कर सकते हैं।”

मां रूपिंदर कौर ने जताई खुशी

गुरिंदरवीर की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनकी मां रूपिंदर कौर ने बेहद खुशी और गर्व जताया। उन्होंने कहा, “हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि हमारे बच्चे ने इतिहास रच दिया है। सभी रिश्तेदार फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह बचपन से ही बहुत खुशमिजाज था और उसके कोच भी बहुत अच्छे रहे। उसके पिता का सपना था कि वह एक एथलीट बने।” इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे अपने माता-पिता की बात सुनें, पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर ध्यान दें और नशे से पूरी तरह दूर रहें।
 

इसे भी पढ़ें: Animesh Kujur की तूफानी दौड़, National Record तोड़कर Commonwealth Games 2026 में बनाई जगह

पिता ने बताया 12 साल की मेहनत का सफर

गुरिंदरवीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि उनका बेटा 12 साल की उम्र से ही इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं खुद वॉलीबॉल खेलता था और चाहता था कि मेरा बेटा भी एक खिलाड़ी बने। उसका पूरा सफर बहुत शानदार रहा है।” उन्होंने युवाओं से कहा कि खेल सेहत के साथ-साथ पंजाब और पूरे भारत के लिए बहुत जरूरी हैं। खेल के मैदान पर ही आप असल में आगे बढ़ते हैं और अपने माता-पिता व गुरुओं का नाम रोशन करते हैं।

कोचों के योगदान को किया याद

कमलजीत सिंह ने गुरिंदरवीर के कोचों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि गुरिंदरवीर के पहले कोच ने उससे बहुत ज्यादा मेहनत करवाई और दसवीं क्लास पूरी होने तक उसे अच्छे से ट्रेन किया। इसके बाद उसने जालंधर में कोच हैप्पी के साथ अपनी ट्रेनिंग शुरू की। कोच हैप्पी ने उसे बिल्कुल अपने बेटे की तरह अपनाया और उसे अपने परिवार के सदस्य जैसा प्यार और सहयोग दिया, जिससे वह आज इस मुकाम पर पहुंच पाया है।

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