भीषण गर्मी में पहाड़ियों के कंटीले-रास्तों पर पैदल चलेंगे लोग:110 किलोमीटर यात्रा में पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी होते हैं शामिल

भीषण गर्मी में पहाड़ियों के कंटीले-रास्तों पर पैदल चलेंगे लोग:110 किलोमीटर यात्रा में पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी होते हैं शामिल

जोधपुर में 100 सालों से भौगीशैल परिक्रमा निकाली जा रही है। इस बार नौतपा में 25 मई से यह परिक्रमा शुरू होगी। हिंदू महीने में अधिकमास आने पर हर 3 साल में इस परिक्रमा में श्रद्धालु शामिल होते हैं। दुर्गम पहाड़ियों, कंटीले रास्तों पर 110 किलोमीटर चलते हुए श्रद्धालु 7 दिन में प्राचीन मंदिरों के दर्शन करते हैं। इस परिक्रमा में जोधपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य सहित हजारों श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। जोधपुर का तापमान अभी 41 डिग्री के आसपास है। वहीं, 25 मई को जोधपुर में हीटवेव का ऑरेंज अलर्ट भी है। 7 दिन पैदल चलेंगे श्रद्धालु इस बार भौगीशैल परिक्रमा 25 से 31 मई तक निकाली जाएगी। इस परिक्रमा में 7 दिन अलग-अलग जगहों पर पड़ाव रहता है। इस बार परिक्रमा में 30 से 40 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान है। हिंदू सेवा मंडल के सचिव विष्णुचंद प्रजापत ने बताया- उस समय जब आने-जाने के साधन नहीं थे तो लोग हरिद्वार और प्रमुख तीर्थ नहीं जा पाते थे, इसलिए यहां भोगीशैल की पहाड़ियों स्थित अरना झरना में अस्थियों का विसर्जन करते थे। हिंदू सेवा मंडल ने फरवरी 1926 में फाल्गुन मास के अधिकमास में इस परिक्रमा का संचालन अपने हाथ में लिया था। तब से लगातार इस परिक्रमा का आयोजन हर तीन साल बाद अधिकमास में किया जा रहा है। दावा है कि अधिकमास के समय परिक्रमा का स्कंध पुराण में भी वर्णन है। पहले देखें 1926 में निकाली यात्रा से लेकर पिछली बार की PHOTOS… 50 कार्यकर्ताओं के साथ हुई शुरुआत, अब हजारों लोग शामिल इस परिक्रमा का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। पहले लोग अपने सिर पर राशन की सामग्री लेकर परिक्रमा करते थे। मान्यता है कि अधिकमास में दान, पुण्य और अपने शरीर को कष्ट देकर की गई तपस्या का फल मिलता है। आज से लगभग 100 साल पहले 1926 में हिंदू सेवा मंडल के 50 कार्यकर्ताओं के साथ इस भोगीशैल परिक्रमा की शुरुआत की गई थी। तब से लेकर आज तक इसका संचालन हिंदू सेवा मंडल ही करता आया है। कोरोना में 2021 में नहीं हुई थी परिक्रमा कोरोना काल के कारण वर्ष 2021 में भोगीशैल परिक्रमा का आयोजन नहीं हो पाया था। इसके बाद 2023 में परिक्रमा 6 साल बाद निकली थी। पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी होते हैं शामिल भोगीशैल परिक्रमा में वर्ष 2012 में पूर्व राज परिवार की कृष्णाकुमारी भी गाड़ी से शामिल हुई थीं। वहीं इस बार भी पूर्व राज परिवार की हेमलता राज्ये भी पैदल परिक्रमा करेंगी। श्रद्धालुओं के भोजन से लेकर सामान की जिम्मेदारी मंडल संभालेगा परिक्रमा को लेकर हिंदू सेवा मंडल की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। तैयारियों के लिए 32 विभाग मिलकर कार्य योजना बना रहे हैं। 7 दिन तक की परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हिंदू सेवा मंडल की ओर से नि:शुल्क भोजन-नाश्ते की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं के मोबाइल के चार्जर सहित अन्य व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। पहले पड़ाव स्थल से अगले पड़ाव स्थल तक यात्रियों के सामान ले जाने की व्यवस्था भी हिंदू सेवा मंडल करेगी। मेले में रोजाना शाम को भक्ति संध्या होगी। इसमें कलाकार भजनों की सरिता बहाएंगे। इसमें हिंदू सेवा मंडल के 300 कार्यकर्ता सेवाएं देंगे। वहीं हिंदू सेवा मंडल के पदाधिकारियों के साथ भौगीशैल की पहाड़ियों पर परिक्रमा के रूट को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने 21 मई को निरीक्षण किया। इस दौरान रूट का जायजा लेते हुए श्रद्धालुओं के चलने के लिए सफेद रंग से रास्ता बनाया गया। मेले की नोडल अधिकारी अदिति पुरोहित ने हिंदू सेवा मंडल के सचिव विष्णु प्रजापत एवं पदाधिकरियों के साथ परिक्रमा मार्ग का जायजा लिया और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। पानी से लेकर दवाइयों की व्यवस्था मेले को लेकर जिला प्रशासन सहित अलग-अलग एजेंसियां भी सहयोग करेंगी। इसमें पीने के पानी से लेकर श्रद्धालुओं की दवाई, मेडिकल जांच की सुविधा भी दी जाएगी। इसके लिए चिकित्सा विभाग का सहयोग रहेगा। परिक्रमा मार्ग में पानी-टेंट की रहेगी व्यवस्था कलेक्टर आलोक रंजन ने हाल ही परिक्रमा मंडल पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान कलेक्टर ने परिक्रमा मार्ग पर सड़क, लाइट, पानी, टेंट और कुंडों में जलापूर्ति सहित व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की थी। वहीं परिक्रमा में सुरक्षा और यातायात के लिए पुलिस ने विशेष परिक्रमा पथ चिन्हित करने के निर्देश दिए। नगर निगम, जेडीए व पीडब्ल्यूडी ने विश्राम स्थलों पर कूलर-पंखा, रात्रिकालीन प्रकाश, जनरेटर और सफाई-मरम्मत का जिम्मा दिया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग 24 घंटे मोबाइल एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें तैयार करेगा और पीएचईडी पेयजल की व्यवस्था करेगा। इसके अलावा स्नान स्थलों पर एसडीआरएफ गोताखोर तैनात रहेंगे। पेयजल के लिए सरस डेयरी दूध के टैंकर उपलब्ध कराएगी। साथ ही नगर निगम मोबाइल टॉयलेट लगाएगा और डिस्कॉम विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था करेगा। परिक्रमा मार्ग में कई प्राचीन मंदिर और कुंड 25 मई को शुरू: भौगीशेल परिक्रमा की शुरुआत हिंदू सेवा मंडल कार्यालय घंटाघर पर ध्वज पूजन के साथ होगी। इसके बाद तीजा मां मंदिर, सोजती गेट पुलिस लाइन होते हुए रातानाडा भाटी चौराहा विनायकजी के दर्शन होंगे। इसके बाद रात्रि विश्राम रातानाडा भाटी चौराहा पर किया जाएगा। दूसरा दिन : 26 मई को सुबह 4 बजे से परिक्रमा ध्वज रवाना होगा। यहां से रिक्तिया भैरूजी, 12वीं रोड, राजेंद्र मार्ग होते हुए मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर, पाल लिंक रोड जूना खेड़ापति हनुमान मंदिर, सैन बगीची होते हुए चौपासनी में रात्रि विश्राम होगा। तीसरे दिन बड़ली में होगा पड़ाव : 27 मई को चौपासनी से हथकरघा भवन, दंताल माता, श्रीजी बैठक, कच्छवाहा चैराहा से पहाड़ी मार्ग होते हुए अरना झरना, भदरेसिया, कदमकंडी होते हुए पड़ाव बड़ली पहुंचेगा। यहां रात्रि विश्राम किया जाएगा। चौथे दिन बैद्यनाथ महादेव में विश्राम : बड़ली से परिक्रमा पड़ाव सोढ़ों की ढाणी, रूपावतों का बेरा, कुई बावड़ी, भूरी बेरी, बृहस्पति कुंड होते हुए बैद्यनाथ महादेव पहुचंकर विश्राम होगा। बेरी गंगा में विश्राम : पांचवें दिन की यात्रा मंडलनाथ महादेव, कुंडली माता, बीएसएफ, जोगी तीर्थ, दईजर माता से पहाड़ी मार्ग होते हुए बेरी गंगा पहुंचेगी। यहां पड़ाव का विश्राम होगा। छठवे दिन मंडोर पहुंचेगी यात्रा: बेरी गंगा से 6वें दिन की यात्रा की शुरुआत सुबह 5 बजे से होगी। यहां से निंबली निम्बा तीर्थ, रेलवे स्टेशन मंडोर बालाजी मंदिर होते हुए पड़ाव का दिन विश्राम मंडोर उद्यान में होगा। शाम 5 बजे भुवनेश्वरी माता के दर्शन कर रात्रि विश्राम कृषि मंडी में किया जाएगा। अंतिम दिन 31 मई को यात्रा का विसर्जन: अंतिम दिन 31 मई को पड़ाव सुबह 5 बजे संतोषी माता, कागा तीर्थ शीतला माता, शेखावत बालाजी के दर्शन कर उम्मेद भवन, रातानाडा गणेश मंदिर, पुलिस लाइन, सोजती गेट, कंदोई बाजार, कपड़ा बाजार, सराफा बाजार, जूनी मंडी गंगश्यामजी मंदिर दर्शन कर परिक्रमा ध्वज हिंदू सेवा मंडल कार्यालय घंटाघर पहुंचकर विसर्जन होगा।

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