बेली ब्रिज निर्माण में तेजी, एक स्लैब का काम पूरा:जून के पहले सप्ताह में छोटे वाहनों का परिचालन संभव; पुल की क्षमता 10 टन भार सहने की होगी

बेली ब्रिज निर्माण में तेजी, एक स्लैब का काम पूरा:जून के पहले सप्ताह में छोटे वाहनों का परिचालन संभव; पुल की क्षमता 10 टन भार सहने की होगी

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज बनाया जा रहा है। तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की निगरानी में चल रहे निर्माण कार्य के तहत एक स्लैब का काम पूरा हो गया है, दूसरे काम काम युद्धस्तर पर जारी है। बिहार देश का पहला राज्य है जहां टूटे हुए पुल पर बेली ब्रिज का निर्माण हो रहा है। पुल की क्षमता 10 टन भार सहने की होगी अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समय सीमा के अंदर काम पूरा करने के लिए इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों की टीम दिन-रात जुटी हुई है। 4 मई को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया था, जिसके बाद पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल बंद होने से भागलपुर, कोसी और सीमांचल क्षेत्र की लाखों आबादी प्रभावित हुई है। वन-वे व्यवस्था होगा लागू राज्य सरकार ने बीआरओ को अस्थायी बेली ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी। करीब 49 मीटर लंबे इस अस्थायी ढांचे के माध्यम से क्षतिग्रस्त हिस्से को जोड़ा जा रहा है, ताकि छोटे वाहनों की आवाजाही जल्द शुरू हो सके। बेली ब्रिज तैयार होने के बाद प्रारंभिक चरण में छोटे वाहनों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इसके लिए विशेष ट्रैफिक प्रबंधन योजना भी तैयार की जा रही है। वन-वे व्यवस्था के तहत नियंत्रित तरीके से वाहनों को पुल पार कराने की योजना बनाई गई है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बेली ब्रिज से हल्के वाहन ही गुजरेंगे कहा कि इस तरह का ब्रिज पहली बार बनाया जा रहा है। यह सामान्य ब्रिज नहीं है, बल्कि एक क्षतिग्रस्त ब्रिज के ऊपर दूसरा ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए विशेष तकनीकी कौशल और सावधानी की जरूरत होती है। ब्रिज पर केवल हल्के वाहन ही चल सकेंगे। चूंकि यह ब्रिज पहले से कमजोर पड़े ढांचे के ऊपर बनाया जा रहा है, इसलिए भारी वाहनों के गुजरने से इसके खिसकने का खतरा बना रहेगा। इसी कारण यहां वाहनों की आवाजाही सीमित रखी जाएगी। नाव से आना-जाना कर रहे लोग भागलपुर में विक्रमशिला पुर टूटने के बाद प्रशासन ने अस्थायी राहत के तौर पर नाव और स्टीमर सेवा शुरू कराई है। सुबह 5 बजे से शाम 5;30 बजे तक नावें चलाई जा रही हैं। निजी नाव चालकों का रजिस्ट्रेशन किया गया और किराया भी तय किया गया, ताकि यात्रियों से मनमानी वसूली न हो। कई लोग अब बरारी घाट और महादेवपुर घाट के बीच नाव से आवागमन कर रहे हैं। करीब 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु भागलपुर को नवगछिया और सीमांचल से जोड़ने वाला बिहार का महत्वपूर्ण पुल है। इसका उद्घाटन वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था। पुल के निर्माण पर उस समय सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए थे। करीब 25 वर्ष पुराने इस पुल को पहले भी जर्जर बताया जाता रहा था। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज बनाया जा रहा है। तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की निगरानी में चल रहे निर्माण कार्य के तहत एक स्लैब का काम पूरा हो गया है, दूसरे काम काम युद्धस्तर पर जारी है। बिहार देश का पहला राज्य है जहां टूटे हुए पुल पर बेली ब्रिज का निर्माण हो रहा है। पुल की क्षमता 10 टन भार सहने की होगी अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समय सीमा के अंदर काम पूरा करने के लिए इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों की टीम दिन-रात जुटी हुई है। 4 मई को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया था, जिसके बाद पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल बंद होने से भागलपुर, कोसी और सीमांचल क्षेत्र की लाखों आबादी प्रभावित हुई है। वन-वे व्यवस्था होगा लागू राज्य सरकार ने बीआरओ को अस्थायी बेली ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी। करीब 49 मीटर लंबे इस अस्थायी ढांचे के माध्यम से क्षतिग्रस्त हिस्से को जोड़ा जा रहा है, ताकि छोटे वाहनों की आवाजाही जल्द शुरू हो सके। बेली ब्रिज तैयार होने के बाद प्रारंभिक चरण में छोटे वाहनों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इसके लिए विशेष ट्रैफिक प्रबंधन योजना भी तैयार की जा रही है। वन-वे व्यवस्था के तहत नियंत्रित तरीके से वाहनों को पुल पार कराने की योजना बनाई गई है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बेली ब्रिज से हल्के वाहन ही गुजरेंगे कहा कि इस तरह का ब्रिज पहली बार बनाया जा रहा है। यह सामान्य ब्रिज नहीं है, बल्कि एक क्षतिग्रस्त ब्रिज के ऊपर दूसरा ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए विशेष तकनीकी कौशल और सावधानी की जरूरत होती है। ब्रिज पर केवल हल्के वाहन ही चल सकेंगे। चूंकि यह ब्रिज पहले से कमजोर पड़े ढांचे के ऊपर बनाया जा रहा है, इसलिए भारी वाहनों के गुजरने से इसके खिसकने का खतरा बना रहेगा। इसी कारण यहां वाहनों की आवाजाही सीमित रखी जाएगी। नाव से आना-जाना कर रहे लोग भागलपुर में विक्रमशिला पुर टूटने के बाद प्रशासन ने अस्थायी राहत के तौर पर नाव और स्टीमर सेवा शुरू कराई है। सुबह 5 बजे से शाम 5;30 बजे तक नावें चलाई जा रही हैं। निजी नाव चालकों का रजिस्ट्रेशन किया गया और किराया भी तय किया गया, ताकि यात्रियों से मनमानी वसूली न हो। कई लोग अब बरारी घाट और महादेवपुर घाट के बीच नाव से आवागमन कर रहे हैं। करीब 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु भागलपुर को नवगछिया और सीमांचल से जोड़ने वाला बिहार का महत्वपूर्ण पुल है। इसका उद्घाटन वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था। पुल के निर्माण पर उस समय सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए थे। करीब 25 वर्ष पुराने इस पुल को पहले भी जर्जर बताया जाता रहा था।  

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