हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को हुए फैक्ट्री हादसे में खगड़िया जिले के बैसा गांव निवासी शैलेश कुमार की मौत हो गई। शैलेश की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और गांव में मातम पसर गया। यह हादसा बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नंबर-2224 स्थित क्लासिक कोल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में हुआ। फैक्ट्री में अचानक बॉयलर फटने से जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण दो मंजिला इमारत का लेंटर गिर गया और पूरे परिसर में आग लग गई। हादसे के समय फैक्ट्री में केमिकल और ग्लू बनाने का काम चल रहा था।
मलबे में दब गए मजदूर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाके की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिससे फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई। कई मजदूर मलबे में दब गए। सूचना मिलने पर फायर विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया, जिसमें बैसा गांव निवासी शैलेश कुमार का शव भी मिला। शनिवार को शैलेश की मौत की खबर गांव पहुंचते ही उनके घर पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। परिवार में पत्नी अमृता कुमारी हरियाणा में बेसुध हो रही थीं, जबकि गांव में बूढ़ी मां जीरा देवी और पिता लक्खन यादव का रो-रोकर बुरा हाल था।
शैलेश की 3 साल पहले हुई थी शादी शैलेश कुमार अपनी पत्नी अमृता कुमारी के साथ हरियाणा में मजदूरी करते थे। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। करीब तीन साल पहले उनकी शादी हुई थी और उनकी एक दो साल की बेटी है। मजदूरी से ही परिवार का गुजारा होता था। गांव में उनका एक छोटा सा घर है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। ग्रामीणों ने बताया कि शैलेश बेहद गरीब परिवार से था, लेकिन मेहनती और मिलनसार इंसान था। गांव में वह सभी लोगों से हंसकर मिलता था और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था। उसके व्यवहार के कारण गांव के लोग उसे काफी पसंद करते थे। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाला शैलेश अब इस दुनिया में नहीं रहा।
15 दिन पहले कमाने गया था हरियाणा मृतक के पिता लक्खन यादव ने बताया कि शैलेश करीब 15 दिन पहले ही घर से कमाने के लिए हरियाणा गया था। उन्होंने कहा कि शनिवार सुबह कॉल के जरिए जानकारी मिली कि शैलेश ड्यूटी से वापस नहीं आया है। पहले कुछ पता नहीं चला, लेकिन देर शाम सूचना मिली कि हादसे में उसकी मौत हो गई। मृतक की मां जीरा देवी रोते हुए कह रही थीं, “मेरा बेटा हमको छोड़कर चला गया, अब हमारा सहारा कौन बनेगा? पहले मुझे जाना था, लेकिन भगवान ने मेरे जवान बेटे को ही छीन लिया।” मां की हालत देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। मृतक के चचेरे भाई राजेश कुमार ने बताया कि शुक्रवार को शैलेश ड्यूटी पर गया था। उसी दौरान फैक्ट्री में बॉयलर फट गया और पूरी बिल्डिंग गिर गई, जिसमें दबकर उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि चार भाइयों में शैलेश सबसे छोटा था और परिवार के अधिकतर सदस्य मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग चाचा अखिलेश कुमार ने बताया कि हादसे की जानकारी शनिवार सुबह मिली। इसके बाद परिवार के लोग शव की तलाश में जुट गए। काफी देर बाद पुलिस प्रशासन की मदद से मलबे से शव निकाला गया। उन्होंने कहा कि सरकार और फैक्ट्री प्रबंधन को पीड़ित परिवार की मदद करनी चाहिए, क्योंकि अब इस परिवार का सहारा छिन गया है। वहीं बैसा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि शिव यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि गांव के कई लोग हरियाणा में मजदूरी करते हैं। उन्होंने सरकार से मृतक के परिवार को उचित मुआवजा, आवास और आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन से बात कर हरसंभव सहयोग किया जाएगा। हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को हुए फैक्ट्री हादसे में खगड़िया जिले के बैसा गांव निवासी शैलेश कुमार की मौत हो गई। शैलेश की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और गांव में मातम पसर गया। यह हादसा बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नंबर-2224 स्थित क्लासिक कोल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में हुआ। फैक्ट्री में अचानक बॉयलर फटने से जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण दो मंजिला इमारत का लेंटर गिर गया और पूरे परिसर में आग लग गई। हादसे के समय फैक्ट्री में केमिकल और ग्लू बनाने का काम चल रहा था।
मलबे में दब गए मजदूर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाके की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिससे फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई। कई मजदूर मलबे में दब गए। सूचना मिलने पर फायर विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया, जिसमें बैसा गांव निवासी शैलेश कुमार का शव भी मिला। शनिवार को शैलेश की मौत की खबर गांव पहुंचते ही उनके घर पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। परिवार में पत्नी अमृता कुमारी हरियाणा में बेसुध हो रही थीं, जबकि गांव में बूढ़ी मां जीरा देवी और पिता लक्खन यादव का रो-रोकर बुरा हाल था।
शैलेश की 3 साल पहले हुई थी शादी शैलेश कुमार अपनी पत्नी अमृता कुमारी के साथ हरियाणा में मजदूरी करते थे। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। करीब तीन साल पहले उनकी शादी हुई थी और उनकी एक दो साल की बेटी है। मजदूरी से ही परिवार का गुजारा होता था। गांव में उनका एक छोटा सा घर है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। ग्रामीणों ने बताया कि शैलेश बेहद गरीब परिवार से था, लेकिन मेहनती और मिलनसार इंसान था। गांव में वह सभी लोगों से हंसकर मिलता था और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था। उसके व्यवहार के कारण गांव के लोग उसे काफी पसंद करते थे। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाला शैलेश अब इस दुनिया में नहीं रहा।
15 दिन पहले कमाने गया था हरियाणा मृतक के पिता लक्खन यादव ने बताया कि शैलेश करीब 15 दिन पहले ही घर से कमाने के लिए हरियाणा गया था। उन्होंने कहा कि शनिवार सुबह कॉल के जरिए जानकारी मिली कि शैलेश ड्यूटी से वापस नहीं आया है। पहले कुछ पता नहीं चला, लेकिन देर शाम सूचना मिली कि हादसे में उसकी मौत हो गई। मृतक की मां जीरा देवी रोते हुए कह रही थीं, “मेरा बेटा हमको छोड़कर चला गया, अब हमारा सहारा कौन बनेगा? पहले मुझे जाना था, लेकिन भगवान ने मेरे जवान बेटे को ही छीन लिया।” मां की हालत देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। मृतक के चचेरे भाई राजेश कुमार ने बताया कि शुक्रवार को शैलेश ड्यूटी पर गया था। उसी दौरान फैक्ट्री में बॉयलर फट गया और पूरी बिल्डिंग गिर गई, जिसमें दबकर उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि चार भाइयों में शैलेश सबसे छोटा था और परिवार के अधिकतर सदस्य मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग चाचा अखिलेश कुमार ने बताया कि हादसे की जानकारी शनिवार सुबह मिली। इसके बाद परिवार के लोग शव की तलाश में जुट गए। काफी देर बाद पुलिस प्रशासन की मदद से मलबे से शव निकाला गया। उन्होंने कहा कि सरकार और फैक्ट्री प्रबंधन को पीड़ित परिवार की मदद करनी चाहिए, क्योंकि अब इस परिवार का सहारा छिन गया है। वहीं बैसा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि शिव यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि गांव के कई लोग हरियाणा में मजदूरी करते हैं। उन्होंने सरकार से मृतक के परिवार को उचित मुआवजा, आवास और आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन से बात कर हरसंभव सहयोग किया जाएगा।


