Trump Tariffs: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए स्वीपिंग ग्लोबल टैरिफ्स को असंवैधानिक करार दे दिया। इस फैसले से ट्रंप की इकोनॉमिक पॉलिसी को बड़ा झटका लगा है, जो भारी टैरिफ्स लगाकर कई देशों से ट्रेड डील्स हासिल करने की रणनीति पर आधारित थी। भारत सहित दर्जनों देशों पर लगाए गए ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ्स अब इनवैलिड हो सकते हैं, जिससे करीब 175-200 अरब डॉलर के टैरिफ रेवेन्यू का रिफंड और ट्रेड डील्स की समीक्षा का रास्ता खुल गया है।
फैसले की बारीकियां और आधार
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की स्पष्ट अनुमति नहीं देता, जो कांग्रेस की संवैधानिक शक्ति पर अतिक्रमण है। ‘मेजर क्वेश्चंस डॉक्ट्रिन’ का हवाला देते हुए कोर्ट ने ट्रंप की व्याख्या को खारिज किया। तीन कंजर्वेटिव जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताई। यह फैसला ट्रंप के दूसरे टर्म की सिग्नेचर पॉलिसी को निशाना बनाता है, जहां उन्होंने फेंटानिल ट्रैफिकिंग, ट्रेड डेफिसिट और अन्य ‘नेशनल इमरजेंसी’ का हवाला देकर अप्रैल 2025 से 10% से ज्यादा टैरिफ्स लगाए थे।
भारत पर क्या असर?
भारत पर 2025 में 25% एडिशनल टैरिफ लगाया गया था, जो रशियन ऑयल इंपोर्ट्स के कारण अगस्त में 50% तक बढ़ा। फरवरी 3, 2026 को इंटरिम ट्रेड डील से इसे 18% तक घटाया गया। अब यह टैरिफ इनवैलिड हो सकता है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को राहत मिलेगी। हालांकि, ट्रंप प्रशासन अन्य कानूनों (जैसे सेक्शन 301 या 232) से नए टैरिफ्स लगा सकता है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि यह ‘बंदूक की नोक’ पर आधारित थी।
अन्य देशों और डील्स का हाल
कनाडा (25-35%), मैक्सिको, चीन (145% तक, बाद में कम), ब्राजील, स्विट्जरलैंड और दर्जनों देश प्रभावित हैं। USMCA (अमेरिका-कनाडा-मैक्सिको) की समीक्षा पर असर पड़ेगा। ट्रंप ने इन टैरिफ्स से ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो की प्रॉसीक्यूशन और कनाडा के एंटी-टैरिफ ऐड पर दबाव बनाया था। फैसले से ये डील्स रद्द या रीनेगोशिएट हो सकती हैं, लेकिन कुछ सेक्टरल टैरिफ्स (स्टील-एल्यूमिनियम) बने रहेंगे। वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितता बढ़ेगी, अमेरिकी कंज्यूमर्स पर बोझ कम होगा।


