मुंबई के मीरा-भायंदर इलाके में मेट्रो लाइन-9 प्रोजेक्ट के तहत बने नए डबल डेकर फ्लाई ओवर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से बना यह डबल-डेकर फ्लाई ओवर शुरुआत में फोर लेन का है लेकिन आगे चलकर अचानक सिर्फ टू लेन का रह जाता है। सोशल मीडिया पर इसकी डिजाइन को इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना बताते हुए तंज कसा जा रहा है। लोगों ने इसे ‘डेथ ट्रैप’ और ‘आसमान में लगने वाला जाम’ जैसे नाम दिए। लोगों ने कहा कि फोर लेन से अचानक टू लेन में सिमटने के कारण यह फ्लाई ओवर बोतलनेक साबित होगा, जिससे भारी ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने किसी भी तरह की डिजाइन खामी से इनकार किया। MMRDA के मुताबिक, फ्लाइओवर का यह लेआउट राइट ऑफ वे की सीमाओं और भविष्य की विस्तार योजना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने X पर लिखा- महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग का चमत्कार। महाराष्ट्र हो या मध्य प्रदेश BJP सरकार में ऐसे जानलेवा ‘चमत्कार’ आम हो चुके हैं। जनता परेशान हो या हादसों में जान गंवाए, सरकार को रत्ती भर फर्क नहीं पड़ रहा। वहीं शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने लिखा कि इससे ट्रैफिक बढ़ेगा। डिजाइन को बेहतर बनाया जा सकता था।
MMRDA बोली- फ्लाई ओवर ट्रैफिक कम करने के उद्देश्य से डिजाइन किया अथॉरिटी का कहना है कि फ्लाई ओवर को ट्रैफिक डिस्पर्सल और ट्रैफिक कम करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इसमें साइनेज, रंबल स्ट्रिप्स और क्रैश बैरियर्स जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं। ट्रैफिक पुलिस के इनपुट के आधार पर आवश्यक बदलाव भी किए जा रहे हैं। MMRDA के अनुसार, मेट्रो-9 का यह डबल डेकर कॉरिडोर कई हिस्सों में बन रहा है। विवादित हिस्सा भायंदर (पूर्व) में दीपक अस्पताल से फाटक रोड तक का करीब 1.5 किलोमीटर लंबा स्ट्रेच है। इसके अलावा SK स्टोन सर्कल से शिवर गार्डन तक का 1.1 किलोमीटर और काशीगांव मेट्रो स्टेशन से साईं बाबा अस्पताल तक का 754 मीटर का हिस्सा पहले ही ट्रैफिक के लिए खोला जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल भायंदर (पूर्व) की ओर 2-लेन बनाई गई हैं, जबकि भायंदर (पश्चिम) की दिशा में भविष्य में दो अतिरिक्त लेन जोड़ने का प्रावधान रखा गया है, जो वेस्टर्न रेलवे लाइन के ऊपर से प्रस्तावित विस्तार से जुड़ा है। फ्लाई ओवर बनाने वाली कंपनी को BMC ने ब्लैकलिस्ट किया था हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने MMRDA की सफाई को गलत बताते हुए कहा कि फ्लाई ओवर की डिजाइन सुरक्षित नहीं है। उन्होंने सितंबर 2022 में उद्योगपति साइरस मिस्त्री की सड़क हादसे में हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी खराब ब्रिज डिजाइन का नतीजा थी। MMRDA वही गलती फिर से दोहरा रही है। वहीं, वकील कृष्णा गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट के काम और जिम्मेदारी तय करने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फ्लाई ओवर बनाने वाली कंपनी जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स को पहले BMC ने ब्लैकलिस्ट कर दिया था, इसके बावजूद उसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट दिए जा रहे हैं। गुप्ता ने यह भी बताया कि इसी कंपनी द्वारा बनाए गए दो डबल डेकर ब्रिज में उद्घाटन के एक साल के भीतर ही गड्ढे पड़ गए थे, जिससे काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… MP का सबसे लंबा फ्लाई ओवर बना भूलभुलैया, सीधा रास्ता…साइन बोर्ड दिखा रहा राइट टर्न, इंडिकेशन में खामियां
जबलपुर में करीब 7 किमी का फ्लाई ओवर मध्य प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर है। 1100 करोड़ की लागत से यह 6 साल में बनकर तैयार हुआ। 23 अगस्त 2025 में इसका शुभारंभ हुआ था। अब 5 महीने पूरे होने जा रहे हैं। बावजूद इसके अब तक खामियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मुंबई में फ्लाई ओवर 4-लेन से 2-लेन हुआ:सोशल मीडिया पर डिजाइन का मजाक बना; कांग्रेस बोली- BJP सरकार में ऐसे जानलेवा चमत्कार आमबात


