मधेपुरा के उदाकिशुनगंज प्रखंड के लश्करी गांव में बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) की ओर से प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। गांव में आयोजित बैठक में सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर जमीन अधिग्रहण का कड़ा विरोध जताया। इस संबंध में जिलाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपा गया है। किसानों का कहना है कि वे सभी छोटे और सीमांत किसान हैं। किसी के पास एक बीघा तो किसी के पास मात्र 10 कट्ठा या उससे भी कम जमीन है। यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। खेती ही उनका एकमात्र जीवन-आधार है, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई कराते हैं। जमीन अधिग्रहण से जीवन हुआ अस्त-व्यस्त ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जमीन अधिग्रहण की स्थिति में उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा और वे बेरोजगारी व भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। किसानों ने निर्णय लिया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। गौरतलब है कि लश्करी पंचायत में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से करीब 276 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव पूर्व से तय है और इसकी आधिकारिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। किसानों की जमीन छीनना अन्यायपूर्ण बैठक में मौजूद पंचायत के मुखिया रजनीश कुमार उर्फ बबलू दास ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर छोटे से गांव के किसानों की जमीन छीनना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों के पास खेती के अलावा आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है। खेती के सहारे ही घर चलता है और बच्चों की शिक्षा होती है। ऐसे में उद्योग लगाने का फैसला सैकड़ों परिवारों के भविष्य पर संकट बन जाएगा। मुखिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहण से रोकने के लिए वे गांव, प्रखंड और जिला स्तर तक आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो किसी भी हद तक जाने को मजबूर होंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस गांव को औद्योगिक क्षेत्र से बाहर रखा जाए। एकमुश्त राशि से किसान का भविष्य नहीं होगा सुरक्षित किसानों ने कहा कि जमीन के बदले मिलने वाली एकमुश्त राशि से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। कुछ समय के लिए भले ही राहत मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक जीवन यापन संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि उनकी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। विरोध जताने वालों में दिलखुश कुमार, वरुण राय, नित्यानंद यादव, राजेश्वर राव, शिवनेश्वरी राय, सीताराम यादव, फोचो यादव, चितनारायण चौधरी, मोहन यादव, लालबहादुर यादव, रमेश यादव समेत कई किसान शामिल थे। मधेपुरा के उदाकिशुनगंज प्रखंड के लश्करी गांव में बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) की ओर से प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। गांव में आयोजित बैठक में सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर जमीन अधिग्रहण का कड़ा विरोध जताया। इस संबंध में जिलाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपा गया है। किसानों का कहना है कि वे सभी छोटे और सीमांत किसान हैं। किसी के पास एक बीघा तो किसी के पास मात्र 10 कट्ठा या उससे भी कम जमीन है। यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। खेती ही उनका एकमात्र जीवन-आधार है, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई कराते हैं। जमीन अधिग्रहण से जीवन हुआ अस्त-व्यस्त ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जमीन अधिग्रहण की स्थिति में उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा और वे बेरोजगारी व भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। किसानों ने निर्णय लिया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। गौरतलब है कि लश्करी पंचायत में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से करीब 276 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव पूर्व से तय है और इसकी आधिकारिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। किसानों की जमीन छीनना अन्यायपूर्ण बैठक में मौजूद पंचायत के मुखिया रजनीश कुमार उर्फ बबलू दास ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर छोटे से गांव के किसानों की जमीन छीनना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों के पास खेती के अलावा आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है। खेती के सहारे ही घर चलता है और बच्चों की शिक्षा होती है। ऐसे में उद्योग लगाने का फैसला सैकड़ों परिवारों के भविष्य पर संकट बन जाएगा। मुखिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहण से रोकने के लिए वे गांव, प्रखंड और जिला स्तर तक आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो किसी भी हद तक जाने को मजबूर होंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस गांव को औद्योगिक क्षेत्र से बाहर रखा जाए। एकमुश्त राशि से किसान का भविष्य नहीं होगा सुरक्षित किसानों ने कहा कि जमीन के बदले मिलने वाली एकमुश्त राशि से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। कुछ समय के लिए भले ही राहत मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक जीवन यापन संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि उनकी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। विरोध जताने वालों में दिलखुश कुमार, वरुण राय, नित्यानंद यादव, राजेश्वर राव, शिवनेश्वरी राय, सीताराम यादव, फोचो यादव, चितनारायण चौधरी, मोहन यादव, लालबहादुर यादव, रमेश यादव समेत कई किसान शामिल थे।


