बिजली विभाग की लापरवाही का नतीजा गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के उद्यमी उठा रहे हैं। गीडा और इंडस्ट्रियल एरिया के लगभग 300 औद्योगिक इकाइयों के संचालकों को निर्धारित उपभोग की तुलना में बिजली का अधिक बिल चुकाने को मजबूर होना पड़ रहा है। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह की ओर से यह मामला शुक्रवार को जिला उद्योग बंधु की बैठक में डीएम के सामने उठाया गया। डीएम दीपक मीणा ने बिजली निगम के अभियंता को दिसंबर तक यह समस्या दूर करने का निर्देश दिया है।
शुक्रवार की शाम जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जिला उद्योग बंधु की बैठक की गई। लंबे समय बाद बड़ी संख्या में उद्यमी यहां उपस्थित हुए थे। उद्यमियों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं बताईं। किसी की जमीन आवंटन को लेकर समस्या थी तो किसी ने सड़क व नाली का मामला उठाया। डीएम ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण कराया जाए। अब जानिए क्यों आ रहा अधिक बिल
बैठक में डीएम को जानकारी देते हुए आरएन सिंह ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में तीन स्लॉट में बिजली का बिल तय होता है। रात 11 से सुबह 6 बजे तक सबसे कम दर पर बिजली का उपभोग किया जा सकता है। इसी तरह दूसरे नंबर का स्लॉट सुबह 6 से शाम 5 बजे तक का है। इसमें थोड़ा अधिक रेट लगाया जाता है। जबकि शाम 5 से रात 11 बजे तक पीक आवर माना जाता है और इसमें सबसे अधिक बिल लिया जाता है। आरएन सिंह ने बताया कि जब बिल आ रहा है तो कुल उपभोग पर रेट पीक आवर का लगाया जा रहा है।
जबकि अधिकतर फैक्ट्रियां रात के उस समय चलती हैं, जब सबसे कम दर है। इससे हर महीने औद्योगिक इकाइयों का बिल 20 प्रतिशत तक बढ़कर आ रहा है। आरएन सिंह ने बताया कि उन्हें समाधान का भरोसा मिला है। उन्होंने बताया कि बिजली निगम के अधिशासी अभियंता ने यह कमी स्वीकार करते हुए ठीक कराने का भरोसा दिया है। गीडा क्षेत्र में नहीं मिलते अधिशासी अभियंता
उद्यमियों ने डीएम से बिजली निगम के अधिशासी अभियंता की शिकायत भी की। उन्होंने कहा कि गीडा एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहां 400 से अधिक इकाइयां संचालित होती हैं लेकिन यहां के अधिशासी अभियंता से मिलना आसान नहीं है। डीएम ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए बिजली निगम के अभियंता के अभियंता से इसका कारण पूछा। अभियंता ने बताया कि उनके पास गीडा के साथ ही घघसरा व सहजनवा का भी चार्ज है। डीएम ने इस मामले में मुख्य अभियंता से बात करने का भरोसा उद्यमियों को दिया है। धुरियापार में 1 एकड़ तक के भूखंड देने की मांग गीडा के पुराने क्षेत्र एवं औद्योगिक गलियारे में जमीन की कीमत अधिक है। यहां लगीाग 7900 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से औद्योगिक इकई लगाने के लिए जमीन दी जा रही है। जबकि दक्षिणांचल में विकसित हो रहे धुरियापार औद्योगिक टाउनशिप में 2700 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लेकिन धुरियापार में 5 एकड़ से छोटा भूखंड आवंटित नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उद्यमियों ने वहां 1 एकड़ तक के भूखंड भी आवंटित करने की मांग की है। गीडा दिवस पर कई उद्यमियों को मिलेगा आवंटन पत्र
गीडा की ओर से सेकटर 27, सेक्टर 28, सेक्टर 11 में भूखंडों के आवंटन के लिए आवेदन निकाले गए हैं। इसमें आवेदन करने वाले लोगों को साक्षात्कार के आधार पर भूखंड आवंटित कर दिया जाएगा। जिन उद्यमियों को भूखंडों का आवंटन होगा, उसमें से कुछ लोगों को 30 नवंबर को गीडा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों आवंटन पत्र प्रदान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि फ्लैटेड फैक्ट्री का आवंटन दिसंबर में शुरू किया जाएगा। इसे आवंटित किया जाएगा या किराए पर देंगे, इसको लेकर फैसला जल्द कर लिया जाएगा। मेडिकल डिस्पोजेबल यूनिट के विरोध में उद्यमी
गीडा में एक रीसेल के प्लाट पर मेडिकल डिस्पोजेबल यूनिट लगाने के विरोध में उद्यमी उतर आए हैं। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने डीएम के सामने यह बात उठायी। उन्होंने कहा कि फूड पार्क वाली जगह पर यह इकाई लगाने की तैयारी है। जबकि फूड पार्क के पास इसे लगाना उचित नहीं है। क्योंकि यहां मेडिकल वेस्ट को रिसाइकिल किया जाएगा। उन्होंने कहीं किनारे यह यूनिट लगाने की मांग की। बैठक में मौजूद गीडा की सीईओ अनुज मलिक ने बताया कि इस इकाई को अनुमति नहीं दी गई है। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज ने इस मामले में पहले ही गीडा सीईओ को पत्र लिखा था। GBC को भव्य बनाने पर मंथन
प्रदेश के साथ ही गोरखपुर में भी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरमेनी के 5वें संस्करण को भव्य बनाने पर मंथन शुरू हो गया है। डीएम ने कहा कि GBC को भव्य बनाना है। सभी विभागों को इसका लक्ष्य दिया गया है। माना जा रहा है कि इस GBC में 7000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरेंगे। डीएम ने निर्देश दिया कि निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित मामलों का निस्तारण प्रमुखता के आधार पर किया जाए। जिलाधिकारी ने फ्लैटेड फैक्ट्री के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण कराने का निर्देश दिया।


