केवल 200 रुपए के लालच में फर्जी सिम नकली नोट गिरोह के मास्टरमाइंड को देने के मामले में कोतवाली पुलिस ने जयपुर से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी जयपुर में छतरी लगाकर सिम पोर्ट,जारी करने का काम करते हैं। आरोपियों ने अपने पास सिम पोर्ट करवाने के लिए आए युवक के डॉक्यूमेंट से सिम इश्यू करवाई। इसके बाद वह नकली नोट गिरोह के मास्टरमाइंड को दी थी। शहर कोतवाल सुनील कुमार जांगिड़ ने बताया कि फर्जी सिम देने के मामले में दो आरोपी विनोद प्रजापत पुत्र गणेश प्रजापत निवासी बगरू और कृश कुमार वर्मा पुत्र राजेंद्र कुमार को बगरू इलाके से गिरफ्तार किया गया। इनमें विनोद ने तो सिम डिस्ट्रीब्यूशन की एजेंसी ले रखी है और कृश उसके यहां सब एजेंट के रूप में काम करता है। आरोपियों ने अपने पास सिम पोर्ट करवाने के लिए आए युवक के डॉक्यूमेंट और लाइव फोटो से सिम जारी की और फिर उसे नकली नोट गिरोह के मास्टरमाइंड को सप्लाई किया था। दरअसल नवंबर महीने में कोतवाली थाना पुलिस ने सीकर में लालचंद को गिरफ्तार किया था। पुलिस को उसके पास से 24 नोट 500-500 रुपए के मिले थे जो नकली थे। आरोपी सीकर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह सीकर के मार्केट में नकली नोट से सामान खरीदने के लिए गया था। ऐसे में मार्केट के लोग उसके हॉस्टल पहुंचे और वहां पर हॉस्टल स्टाफ को इस मामले से अवगत करवाया। हॉस्टल स्टाफ ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस ने लालचंद के कमरे में दबिश दी थी। जहां से पुलिस को नकली नोट मिले थे। लालचंद ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि वह अपने रिश्तेदार परमेश्वर के साथ जयपुर से नकली नोट लेकर आया था। पुलिस इसके बाद फरीदाबाद में परमेश्वर को गिरफ्तार करने के लिए गई। पुलिस को उसके पास से भी 500-500 रुपए के 22 नकली नोट मिले थे। दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वह नकली नोट देने वाले को नहीं जानते उनकी तो फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद जयपुर के मानसरोवर में हेलमेट लगाकर आया युवक उन्हें नकली नोट देकर चला गया था। आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि उनके पास मास्टरमाइंड का नंबर है ऐसे में पुलिस ने उस युवक की जानकारी जुटाई। जिसके नाम से सिम जारी थी,पुलिस ने उससे भी पूछताछ की। उसी युवक ने पुलिस को बताया था कि उसके पास कोई सिम नहीं है जिससे उसने नकली नोट के लिए कॉल किया हो। उस युवक ने पुलिस को बताया कि वह तो सिम पोर्ट करवाने के लिए गया था। उस युवक के बताए अनुसार ही पुलिस विनोद और कृश तक पहुंची। जहां उन दोनों ने बताया कि जब युवक सिम पोर्ट करवाने के लिए आया था तो उन्होंने लाइव फोटो सही नहीं आने की बात कहकर दो बार फोटो क्लिक करी। एक बार तो सिम पोर्ट कर दी और दूसरी बार उस लाइव फोटो और डॉक्यूमेंट के जरिए नई सिम जारी कर ली। उनसे जो फर्जी सिम लेने आया था उसने 200 रुपए लेकर वह सिम दे दी। हालांकि वह नहीं जानते कि सिम लेने वाला आखिर था कौन। थानाधिकारी सुनील कुमार जांगिड़ ने बताया कि अभी मामले में फरार चल रहे आरोपियों की तलाश की जा रही है। थानाधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि इस तरह से फर्जी सिम जारी करना एक गंभीर अपराध है। सिम को कोई किसी अपराध या आतंकी गतिविधि में भी काम ले सकता है।


