बेगूसराय में बरौनी डेयरी से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थानीय किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। करीब 100 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई है। प्रभावित किसानों ने अब प्रशासन और डेयरी प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के अनुसार बरौनी डेयरी पिछले 50-60 वर्षों से संचालित हो रही है, लेकिन समस्या पिछले 15 वर्षों में तब गंभीर हुई जब प्रबंधन ने अपने परिसर के पास स्थित पुराने पोखर को बंद कर दिया। इसके बाद, डेयरी का सारा पानी दूसरे पोखर में डाइवर्ट कर दिया गया। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण यह पोखर ओवरफ्लो हो जाता है। यह पानी आसपास के खेतों, विशेषकर बांस के खेतों और उपजाऊ जमीनों में फैल जाता है। किसानों का कहना है कि अंग्रेजों के जमाने में इस क्षेत्र की जमीन का इस्तेमाल नील की खेती के लिए किया जाता था, जो इसकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है। लेकिन आज डेयरी के रसायन युक्त और अत्यधिक पानी के कारण यह अनमोल जमीन बर्बाद हो रही है। ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक चक्कर काट रहे हैं पीड़ित अजय कुमार राय ने बताया कि हम सब किसान तीन प्रमुख मांग लगातार प्रशासन के सामने रख रहे हैं। बरौनी डेयरी अपने पानी के भंडारण और निकासी की उचित व्यवस्था करे, जिससे किसानों के खेत में पानी नहीं भरें। 2013-14 में एक बार मुआवजा दिया गया था। उसके बाद से कोई सहायता नहीं मिली। किसान अब तक हुए नुकसान के उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। जो जमीनें पानी के ठहराव के कारण बंजर हो चुकी हैं, उन्हें दोबारा खेती योग्य बनाने के लिए सरकार और डेयरी प्रबंधन आर्थिक सहायता प्रदान करे। इस समस्या से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को हो रहा है। कई किसानों के पास कुल जमा दो से चार कट्ठा जमीन ही है, वह भी पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। मेरे हिस्से की एक बीघा तीन कट्ठा जमीन में से एक बीघा जमीन पूरी तरह पानी में विलीन हो चुकी है। परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस समस्या के समाधान के लिए ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक के चक्कर काटे हैं। सीओ, बीडीओ, डीईओ और डीएम को आवेदन दे चुके हैं। फिर भी कुछ नहीं हुआ है। आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला वहीं, पैक्स अध्यक्ष कौशल किशोर ने बताया कि स्थानीय विधायक, सांसद और मंत्रियों तक लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं। हर जगह से सिर्फ जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। डेयरी प्रबंधन इस मामले में पूरी तरह से टालमटोल का रवैया अपनाए हुए है। जिम्मेदारी लेने से साफ इंकार कर रहा है। समय-समय पर अधिकारी सर्वे करने आते हैं, लेकिन फाइलें दफ्तरों में ही दबी रह जाती हैं। अगर जल्द ही बरौनी डेयरी के पानी की निकासी का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया और किसानों को मुआवजा नहीं मिला, तो क्षेत्र के सैकड़ों किसान उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। जल्द होगा समस्या का समाधान इस संबंध में डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। बेगूसराय में बरौनी डेयरी से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थानीय किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। करीब 100 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई है। प्रभावित किसानों ने अब प्रशासन और डेयरी प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के अनुसार बरौनी डेयरी पिछले 50-60 वर्षों से संचालित हो रही है, लेकिन समस्या पिछले 15 वर्षों में तब गंभीर हुई जब प्रबंधन ने अपने परिसर के पास स्थित पुराने पोखर को बंद कर दिया। इसके बाद, डेयरी का सारा पानी दूसरे पोखर में डाइवर्ट कर दिया गया। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण यह पोखर ओवरफ्लो हो जाता है। यह पानी आसपास के खेतों, विशेषकर बांस के खेतों और उपजाऊ जमीनों में फैल जाता है। किसानों का कहना है कि अंग्रेजों के जमाने में इस क्षेत्र की जमीन का इस्तेमाल नील की खेती के लिए किया जाता था, जो इसकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है। लेकिन आज डेयरी के रसायन युक्त और अत्यधिक पानी के कारण यह अनमोल जमीन बर्बाद हो रही है। ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक चक्कर काट रहे हैं पीड़ित अजय कुमार राय ने बताया कि हम सब किसान तीन प्रमुख मांग लगातार प्रशासन के सामने रख रहे हैं। बरौनी डेयरी अपने पानी के भंडारण और निकासी की उचित व्यवस्था करे, जिससे किसानों के खेत में पानी नहीं भरें। 2013-14 में एक बार मुआवजा दिया गया था। उसके बाद से कोई सहायता नहीं मिली। किसान अब तक हुए नुकसान के उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। जो जमीनें पानी के ठहराव के कारण बंजर हो चुकी हैं, उन्हें दोबारा खेती योग्य बनाने के लिए सरकार और डेयरी प्रबंधन आर्थिक सहायता प्रदान करे। इस समस्या से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को हो रहा है। कई किसानों के पास कुल जमा दो से चार कट्ठा जमीन ही है, वह भी पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। मेरे हिस्से की एक बीघा तीन कट्ठा जमीन में से एक बीघा जमीन पूरी तरह पानी में विलीन हो चुकी है। परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस समस्या के समाधान के लिए ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक के चक्कर काटे हैं। सीओ, बीडीओ, डीईओ और डीएम को आवेदन दे चुके हैं। फिर भी कुछ नहीं हुआ है। आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला वहीं, पैक्स अध्यक्ष कौशल किशोर ने बताया कि स्थानीय विधायक, सांसद और मंत्रियों तक लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं। हर जगह से सिर्फ जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। डेयरी प्रबंधन इस मामले में पूरी तरह से टालमटोल का रवैया अपनाए हुए है। जिम्मेदारी लेने से साफ इंकार कर रहा है। समय-समय पर अधिकारी सर्वे करने आते हैं, लेकिन फाइलें दफ्तरों में ही दबी रह जाती हैं। अगर जल्द ही बरौनी डेयरी के पानी की निकासी का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया और किसानों को मुआवजा नहीं मिला, तो क्षेत्र के सैकड़ों किसान उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। जल्द होगा समस्या का समाधान इस संबंध में डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।


