चूरू के श्रीराम मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का मंगलवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथावाचक पं. हरीश ठाकुर ने सुदामा चरित्र और श्रीशुकदेव की विदाई प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, मित्रता और समर्पण का संदेश दिया। पं. ठाकुर ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को सच्चे प्रेम, त्याग, विश्वास और निष्काम भक्ति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुदामा ने भगवान से कुछ नहीं मांगा, फिर भी श्रीकृष्ण ने उनकी भावनाओं को समझकर उन्हें सम्मान और वैभव प्रदान किया। यह प्रसंग ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और समर्पण के महत्व को दर्शाता है। कथा के दौरान सुदामा के द्वारका आगमन, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने मित्र का स्वागत करने और उनके चरण धोने के प्रसंग का वर्णन किया गया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पं. ठाकुर ने बताया कि कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और उसे आत्मिक शांति व मोक्ष का मार्ग मिलता है। कथा के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया। महोत्सव के दौरान एक भजन संध्या भी आयोजित हुई, जिसमें कानपुर के भजन गायक मन्नत शर्मा और राम त्रिपाठी ने प्रस्तुतियां दीं। चूरू के मेहुल शर्मा, अनुज गोयल और राकेश दाधीच ने भी भजन गाए।


